हिमा दास : जुनून और जज़्बे से भरा स्वर्णिम सफर

19 वर्ष की दुबली पतली सी एक लड़की आंखों में कुछ कर गुजरने का जुनून लिए अपनी किस्मत से जूझती रहती है. वह बेहद गरीब परिवार से होती है इसलिए उसे आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल पाता है. लेकिन उसे शुरु से खेल का बड़ा शौक होता है, वह अपने स्कूल में फुटबाल खेलती थी. लेकिन वह गरीब परिवार से होती है इसलिए उसे वह आधुनिक सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं जो कि खिलाड़ी को मिलना चाहिए.

हालांकि चूंकि वो फुटबाल खेलती थी इसलिए उसका स्टैमिना काफी ज्यादा बढ़ गया था. इसलिए वह दौड़ते वक्त जल्दी थकती नहीं थी उस लड़की की इसी स्टैमिना को उसके फिजिकल स्पोर्ट्स के शिक्षक ने पहचान लिया और उन्होंने उस लड़की को फुटबाल की बजाय एक रेसर बनने के लिए प्रेरित शिक्षक की प्रेरणा से वह लड़की एक एथिलीट के तौर पर दौड़ना शुरु किया.

हालांकि आधुनिक सुविधाओं के अभाव में उस लड़की को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन बुलंद हौसले और कुछ कर गुजरने के जुनून के साथ एक बार वो लड़की जो रेसिंग ट्रैक पर दौड़ी तो फिर न तो वह रुकी और न ही उसने पीछे मुड़कर देखा.

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ये कहानी किसी और की नहीं बल्कि भारत की स्टार स्प्रिंटर हिमा दास की है. असम के ढिंग की रहने वाली हिमा दास को ढिंग एक्सप्रेस के नाम से भी जाना जाता है. हिमा ने चेक गणराज्य में खेली जा रही ट्रैक एंड फील्ड प्रतियोगिता में पिछले 21 दिनों में 6 गोल्ड मेडल जीतकर एक नया इचिहास रच दिया है. हिमा की असाधारण उपलब्धि का सिलसिला लगातार जारी है.

सिर्फ इतना ही नहीं हिमा ने चेकगणराज्य में खेल में व्यस्त होने के बावजूद अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपनी एक महीने की सैलरी को मौजूदा समय भीषण बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहे अपने राज्य असम के डिजास्टर रिलीफ फंड में दान कर दिया. इसके साथ ही उन्होंने और भी लोगों से बाढ़ पीड़ित असम की मदद के लिए आगे आने का आह्वान किया. hima das biography

उल्लेखनीय है कि हिमा असम में ही इंडियन ऑयल कार्पोरेशन में एचआर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें यह नौकरी खेल कोटे के तहत ही दी गई है. लेकिन हिमा के रेसिंग कैरियर को पहचान 2017 में उस वक्त मिली जब असम में ही युवा कल्याण मंत्रालय की ओर से आयोजित इंटर डिस्ट्रिक्ट कंपटीशन में उन्होंने हिस्सा लिया. hima das biography

खास बात यह रही कि इस दौरान हिमा ने बेहद सस्ते और पुराने जूते पहने हुए थे जिनसे दौड़ पाना काफी मुश्किल था लेकिन जुझारू प्रवृति की हिमा न सिर्फ दौड़ी बल्कि उन्होंने इस रेस में पहला स्थान भी हासिल किया. इसी दौरान उनकी मुलाकात उनके कोच निपुण दास से हुई और उन्होंने हिमा की दौड़ने की स्पीड और उनका स्टैमिना देखने के बाद हिमा को ट्रेनिंग देने की इच्छा जताई.

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क्योंकि हिमा गरीब परिवार से थी इसलिए उन्होंने कोच को अपनी समस्या बताई जिसके बाद उनके कोच निपुण दास हिमा के माता-पिता की इजाजत लेकर उन्हें गुवाहाटी लेकर आए और खुद से उनका सारा खर्च वहन किया. इस बीच हिमा ने बैंकांक में एशियाई चैम्पयनशिप में हिस्सा लिया और 7वें स्थान पर रहीं उसके बाद हिमा ने ऑस्ट्रेलिया में खेले गए कॉमनवेल्थ गेम में भारत की तरफ से हिस्सा लिया जहां वह छठे स्थान पर रहीं. hima das biography

लेकिन हिमा ने हार नहीं मानी और इसके बाद उन्होंने एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया और शानदार जीत हासिल की. इसके बाद अब वह सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहीं हैं जिसकी वजह से पूरे देश में एक सुर से उनकी प्रशंसा हो रही है. खास बात यह है हाल ही में हिमा 6 स्वर्ण पदक जीतने के बाद देश की पहली महिला बन गई हैं जिन्होंने वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पयनशिप ट्रैक कंपटीशन में स्वर्ण पदक हासिल किया है. hima das biography

कुलदीप सिंह

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