निरहुआ करेंगे करिश्मा या अखिलेश फिर गाड़ेंगे समाजवाद का झंडा

आजमगढ़: निरहुआ करेंगे करिश्मा या अखिलेश फिर गाड़ेंगे समाजवाद का झंडा

तमसा नदी के तट पर स्थित आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित है जो कि गंगा और घाघरा नदी के मध्य बसा हुआ है. पूर्वी यूपी का यह जिला मऊ, गोरखपुर, गाजीपुर, जौनपुर, सुल्तानपुर और अम्बेडकर जिले की सीमा से लगा हुआ है आजमगढ़ की स्थापना शाहजहां के शासनकाल के दौरान एक शक्तिशाली जमींदार रहे विक्रमजीत सिंह गौतम के पुत्र आजम खान ने 1665 मे किया था. आजमगढ़ का पुराना नाम आर्यमगढ़ था.

लेकिन मौजूदा समय में आजमगढ़ लोकसभा चुनाव के कारण चर्चा में है इसका मुख्य कारण यह है कि यहां से सपा के संरक्षक रहे मुलायम सिंह 2014 में जीते थे उनके बाद अब उनके बेटे और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव यहां से चुनावी मैदान में हैं और उनके खिलाफ भाजपा ने भोजपुरी सिनेस्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ को अपना उम्मीदवार बनाया है.

हालांकि इस लोकसभा सीट को कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी का गढ़ माना जाता रहा है. इसका कारण यह है कि यहां पर 1952 से 1971 तक कांग्रेस लगातार जीतती आई है. इसके बाद 1977 में जनता पार्टी के रामनरेश यादव ने यहां पर जीत हासिल किया था लेकिन इसके अगले ही साल 1978 में यहां पर कांग्रेस के मोहसिन किदवई ने फिर से कमबैक करते हुए दोबारा जीत दर्ज किया था.

सपा को वोट देने की अपील करने पर चुनाव अधिकारी को पीटा

कांग्रेस के बाद आजमगढ़ सीट पर बहुजन समाज पार्टी ने 5 बार जीत दर्ज किया था. इस सीट पर बसपा के रामकृष्ण यादव ने 1989 में जीत हासिल कर बसपा का खाता खोला था. इसके बाद 1998 में बसपा के अकबर अहमद ने, 1999 में सपा के रमाकांत यादव ने, इस सीट पर फतह किया था. इसके बाद 2004 में रमाकांत यादव सपा छोड़कर बसपा में शामिल हुए और एक बार फिर से जीत हासिल किया था. जबकि 2008 में आजमगढ़ में बसपा के खबर अहमद ने एक बार फिर से यहां जीत हासिल किया.

वहीं 2009 में बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए रमाकांत यादव ने एक बार फिर से इस सीट पर अपना परचम लहराया. लेकिन 2014 के दौरान मोदी लहर के बावजूद समाजवादी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने यहां पर जीत का परचम लहराया था. ऐसे में इस सीट का पूरा चुनावी गणित देखने के बाद इस बात की तस्वीर साफ हो रही है कि आजमगढ़ में सपा, भाजपा के मुकाबले ज्यादा मजबूत स्थिति में दिख रही है इसके अलावा 2019 लोकसभा चुनावों के लिए सपा, बसपा ने आपस में गठबंधन किया है.

मंद बुद्धि बच्चों का मेमोरी पॉवर बढ़ने एवं बैक पैन, जॉइंट पैन, के चमत्कारी उपाय।

जिससे यहां का चुनावी गणित सपा-बसपा गठबंधन के पक्ष में जाता दिखाई दे रहा है जिससे भाजपा के स्टार कैंडीडेट दिनेशलाल यादव उर्फ निरहुआ की राह मुश्किल लग रही है. लेकिन 2011 की जनगणना के मुताबिक आजमगढ़ की जनसंख्या 46,13,913 हैं जिसमें 22,85,004 पुरूष और 23,28,909 महिलाएं थी. इसके अलावा 2011 की जनगणना के मुताबिक आजमगढ़ का लिटरेसी रेट 70.93 फीसदी रहा था जबकि 2001 में 56.95 पर ही था. बहरहाल आजमगढ़ पर कौन जीत हासिल करता है यह तो 23 मई के बाद ही पता चलेगा लेकिन इतना तो तय है कि यहां पर मुकाबला बेहद रोमांचक होने वाला है.

राजनीति के चुनावी अखाड़ा होने के अलावा आजमगढ़ को तपस्वियों की पुण्य भूमि भी कहा जाता है. साथ ही इसे स्वतंत्रता सेनानियों की भूमि के नाम से भी जाना जाता है. इसके अलावा पर्यटन की द़ृष्टि से यहां पर महाराजगंज, दुर्वासा, मुबारकपुर, मेहनगर, भंवरनाथ मंदिर और अवन्तिकापुरी जैसे स्थान विशेष रूप से प्रसिद्ध है. यहां स्थित अवंतिकापुरी महाभारत कालीन इतिहास को अपने में संजोए है. कहा जाता है कि महाभारत काल के दौरान यही पर जन्मेजय ने पूरी दुनिया के सर्पों को मारने के सर्प यज्ञ किया था. साथ ही ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्ध विरासत को समेटे आजमगढ़ सड़क मार्ग और हवाई मार्ग के साथ रेल मार्ग से राज्य के दूसरे शहरों से साथ पूरी तरह से जुड़ा हुआ है. हवाई मार्ग से आजमगढ़ जाने के लिए यहां का निकटतम एयरपोर्ट वाराणसी एयरपोर्ट है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *