पीएम मोदी ने ऐसे ही नही राजीव गांधी को किया टार्गेट, ये है वजह

पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के पिता और पूर्व पीएम राजीव गांधी पर बड़ा राजनीतिक हमला करते हुए बोफोर्स तोप घोटाले मामले में उन्हें भ्रष्टाचारी नंबर-1 बताया था. लोकसभा के चुनावी महासमर में पीएम मोदी के अचानक से अपनी रणनीति बदलने से सभी राजनीतिक दल हैरान रह गए.

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हालांकि पीएम मोदी के अचानक से अपनी रणनीति बदलने को लेकर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सब कुछ अनायास ही नही हुआ है बल्कि इसके पीछे उनकी सोची समझी रणनीति का एक अहम हिस्सा है.

आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव के आखिरी दो चरणों के चुनाव से ठीक पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर हमले के लिए राहुल गांधी को छोड़कर अचानक 30 साल पीछे जाकर उनके पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को बोफोर्स मामले में घेरा और काग्रेस को चुनौती देते हुए कहा था कि अगर कांग्रेस में दम है तो राजीव गांधी के मान सम्मान के नाम पर चुनाव लड़ के दिखाए. मोदी की इस नई रणनीति से कांग्रेस तिलमिलाई हुई है.

बता दें कि पीएम मोदी का ये बयान ऐसे ही नही आया है. पीएम मोदी के पिछले बयानो के देखें तो स्पष्ट तौर पर परिलक्षित होता है कि राजनीति में उनका प्लान पहले से सेट था कि किस वक्त पर कौन सा मुद्दा उठाना है. और जी हां राजीव गांधी का नाम उछालने के पीछे चुनावी रणनीति यह है कि ऐसा करके पीएम मोदी कांग्रेस के चौकीदार चोर है नारे का जबाव दे रहे हैं.

इसके अलावा लोकसभा के अगले चरणों में पंजाब की 13 और दिल्ली की 7 सीटों पर वोटिंग होनी है और खास बात यह है कि पंजाब और दिल्ली दोनो जगह 1984 में हुए सिख विराधी दंगे बेहद संवेदनशील मुद्दा है. इसीलिए मोदी अचानक 30 साल पीछे जाकर राजीव गांधी के बहाने कांग्रेस पर हमले कर रहे हैं.

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यहां हम आपको यह भी बता दें कि अगले दो चरणों में पंजाब की 13, दिल्ली की 7, बिहार की 16, यूपी की 27, हरियाणा की 10, झारखंड की 7, एमपी की 4, पश्चिम बंगाल की 17, हिमाचल प्रदेश की 5 सीटों पर चुनाव होने हैं. और पंजाब, हरियाणा. हिमाचल प्रदेश और दिल्ली जैसी जगहों पर सिखों की अच्छी रहती है. जिसके तहत हरियाणा और दिल्ली को छोड़कर पंजाब में भाजपा कमजोर पड़ रही थी. क्योंकि इन जगहों पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का भी अच्छा प्रभाव है.

 ऐसे में जहां पीएम मोदी बोफोर्स, और सिख दंगे के मामले को उठाकर एक बार फिर से सिखों को अपने फेवर में कर सकते है. आपको बता दें कि मोदी सरकार ने ही सिख दंगों की फाइल को दोबारा खुलवाया था जिसके बाद कांग्रेस नेता सज्जन सिंह को उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी.

इसलिए भाजपा को लगता है कि इस मुद्दे को उठाकर पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के वोट में आसानी से सेंध लगा सकती है. हालांकि प्रधानमंत्री का यह गेम कितना सफल होगा यह तो 23 मई के बाद ही पता चल सकेगा लेकिन इतना जरूर है अचानक से राजीव गांधी को टार्गेट करने से कांग्रेस की स्थिति जले पर नमक छिड़कने जैसी हो गई है. बोफोर्स मामले में पूर्व पीएम राजीव गांधी का नाम लेने से कांग्रेस तिलमिलाई हुई है साथ ही बैकफुट पर भी आ गई है. 

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