जरूरतमंद लोगों की सेवा से मिलता है सुकून- CA अखिलेश चंद्र ‘शुक्ला’

बहुआयामी प्रतिभा के धनी सीए अखिलेश चंद्र जरूरतमंद लोगों को लगातार सहायता पहुंचा रहे हैं। उनकी पहचान न सिर्फ सीए, बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता, मार्गदर्शक, धार्मिक कार्यों में विशेष रूचि रखने वाले के रूप में भी हैं। इनके अलावा और भी कई विशेषताएं उनमें हैं, जो उनके कार्यों और आचरण में दिखाई देती हैं। एमआई मीडिया न्यूज के चीफ एडिटर नीरज कुमार ने अखिलेश चंद्र शुक्ला से उनके परिवार से लेकर करियर के शुरूआती दिनों के अलावा विभिन्न विषयों पर बेबाकी से चर्चा की – CA akhilesh chandra

  • समाज सेवा की प्रेरणा आपको कहां से मिली?

मेरे जीवन का उद्देश्य ही रहा है मन, वचन और कर्म से औरों की मदद करना। निश्चिततौर पर अगर आप मन, वचन और कर्म से दूसरों की सेवा के लिए अपने  समय का योगदान करते हैं तब सब कुछ हासिल हो जाता है। आम लोगों की सहायता करना हमारा संकल्प रहा है। शुरू से ही हमें दूसरों की सहायता करने पर जीवन में संतोषपूर्ण अनुभव प्राप्त होता है। जहां तक समाजसेवा की प्रेरणा का सवाल है तो यह मुझे अपनी मां से हासिल हुआ है। उन्होंने मुझे सिखाया कि समाज के लिए हमें कुछ न कुछ करते रहना चाहिए।

  • आपकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा कहां से हुई?

 मेरी प्रारंभिक शिक्षा सुल्तानपुर जिले में हुई। हमने सन 1993 में दसवीं बीपी इंटर कॉलेज कुड़वार से किया। 1995 में 12वीं एमजीएस इंटर कॉलेज सुल्तानपुर से किया। 1998 में बीकॉम की पढ़ाई कमला नेहरू विश्वविद्यालय सुल्तानपुर से किया। वर्ष 2000 में एम कॉम किया। 1998 में राजापुर पोस्ट ऑफिस में पोस्ट मास्टर की नौकरी लगने के बाबजूद, कुछ विशेष करने की ललक के कारण हमने यहां नौकरी छोड़ दी। उसके बाद लेक्चरर बनने का विचार आया। उसके बाद मन में आया की एमबीए करते हैं। इस बीच 2001 में दिल्ली आ गया और एमबीए करने का मन बनाया।  इसके लिए विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाएं दी जिसमें सफलता भी हासिल किया। लेकिन फिर  लगा कि कुछ और विशेष करना चाहिए। इसी को देखते हुए मेरे मन में सीए बनने का जुनून पैदा हुआ और फिर मैंने जनवरी 2007 में उसे पूरा किया। 

  • सीए के बारे क्या आपने पहले कभी सुना था?

जी हां मेरे दादा जी हिंदुस्तान टाइम्स में कार्यरत थे। इनके द्वारा ही मैं सीए के बारे में सुना करता था। तब से मेरे मन में भी सीए बनने का विचार आया। मेरे बड़े भाई साहब ने जब मैं बीकॉम रह रहा था तब उन्होंने ही सीए की कुछ किताबें खरीद दी जिस कारण इस तरफ और रुझान हुआ। जिसमें मेरे ससुर जी का भी काफी प्रोत्साहन और सहयोग रहा।

CA akhilesh chandra

  • जब आप कर रहे होंगे तो काफी उतार-चढ़ाव आए होंगे?

निश्चिततौर पर यह कठिन दौर था। वो भी शादी के बाद सीए करना। वर्ष 2000 में पुत्र रत्न एवं वर्ष 2002 में लक्ष्मी रूपी पुत्री की प्राप्ति हुई। लेकिन लगन और कठिन परिश्रम से हर संघर्ष को पार किया जा सकता है। घर चलाने के लिए पैसे की जरूरत भी होती थी जिस कारण मैंने बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया और लगातार कठिन परिश्रम करके वर्ष जनवरी 2007 में चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) बनने का अपना लक्ष्य पूरा किया।  CA akhilesh chandra

  • पहली नौकरी की शुरूआत कहां से हुई?

जब मैं सीए कर रहा था उस समय से ही मैंने पार्ट टाइम अकाउंटिंग और कुछ व्यक्तिगत आईटीआर भरा करता था चूंकि मैं शुरू से ही नौकरी नहीं करना चाहता था इसलिए नौकरी नहीं की। मन में प्रैक्टिस  करने का विचार शुरू से ही था और अपने निजी प्रैक्टिस की शुरूआत भगवान नगर दिल्ली से प्रारंभ किया।

  • आप कई तरह के सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे हैं? क्या किसी संस्थान से भी आपका जुड़ाव है?

जैसा कि आपको पहले भी बताया कि समाज सेवा की प्रेरणा मुझे अपनी माता जी से मिला इसलिए मैं बचपन से ही सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेता था जबकि मैंने पूर्ण सक्रिय होकर साल 2011 में दिल्ली की एक सामाजिक संस्था पूजस वेलफेयर सोसायटी से जुड़ गया। जिसमें खास तौर पर गरीब बच्चों को पढ़ने-लिखने के लिए किताब मुहैया कराना। उनके लिए यूनिफॉर्म बैग इत्यादि की सहायता करना है। यह संस्था विविध प्रकार के सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रम से जुड़ा है। जिसमें जरूरतमंदों को सहायता करने से लेकर धार्मिक कार्य भी शामिल है। संस्था ने मेरे कार्यों के प्रति लगन एवं निष्ठा देखते हुए मुझे बाद में इसी संस्था (पूजस वेलफेयर सोसायटी) का अध्यक्ष नियुक्त किया जिसके बाद मैंने कई तरह के कार्यक्रम की शुरूआत की। खास तौर से गरीब बच्चों के लिए कई कार्यक्रम की शुरूआत की जिसका लाभ आज बच्चों को मिल रहा है।

  • हमने सुना है आप सरायकाले खां के पास गायसपुर और बहलोलपुर में भी कुछ सामाजिक कार्य कर रहे हैं?

निश्चिततौर पर देश की राजधानी दिल्ली अपनी चमक दमक के लिए जानी जाती है लेकिन इसके बावजूद आज भी ग्यासपुर और बहलोलपुर के लोग आधुनिक सुख सुविधा तो छोड़िए बुनियादी सुविधा से भी वंचित है। ग्यासपुर और बहलोलपुर में अथक प्रयास से ही यहां बिजली लगने का कार्य प्रगति पर है और जल्द ही यहां के लोगों को बिजली का कानेक्शन भी मिल जाएगा। जिसके लिए हमने लंबा संघर्ष किया है। ग्यासपुर और बहलोलपुर में कई और सुविधाएं उपलब्ध कराना है जिसके लिए संघर्ष जारी है। CA akhilesh chandra

  • क्या आप भगवान पर विश्वास करते हैं? धार्मिक कार्यों से भी आपका जुड़ाव रहा है?

जी हां ईश्वर में सबको आस्था और विश्वास रखना चाहिए। रही बात मेरी तो मेरा परिवार धार्मिक प्रवृत्ति का है इसलिए बचपन से ही मुझे ईश्वर में विश्वास है हम प्राय: रामलीला एवं हनुमानगड़ी दर्शन के लिए अयोध्या जाते रहे हैं। सावन के महीने में कावरियां शिविर का आयोजन हमने लगातार किया है। और हमने अपने पैतृक गांवों में भगवान हनुमान जी एवं भगवान राम दरवार मंदिर निर्माण कार्य शुरू करवाया। यह मंदिर राजापुर गांव में बन रहा है। इस मंदिर का बनवाने का उद्देश्य उन सभी बुजुर्ग और असमर्थ लोगों लिए है जो राम लला और हनुमान जी का दर्शन करने अयोध्या नहीं जा पाते हैं। जिसे कि हम वहां इसी मंदिर में दर्शन कर धार्मिक लाभ उठा सकते हैं।

  • आपके आदर्श कौन हैं?

हमारे आदर्श हमारे पूज्य पिता जी हैं। उन्होंने अपने कठिनतम दौर को  बेहतर ढ़ंग से संघर्षकर ऊंचाईयों को पाया। धार्मिक मामले में वो मुझसे भी आगे हैं उन्होंने सभी तीर्थों का दर्शन किया है और अभी भी धार्मिक स्थलों के दर्शन को जाते रहते हैं और उनका आचरण हमें बहुत प्रभावित करता है। मेरे जीवन में मेरी मां का भी काफी प्रभाव है जिनकी कार्यशैली से हमे सामाजिक कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। और माता जी लिए एक खास बात है जो आपको बताता हूं मेरी माता जी सबकी खूशी में खुश और दुख में दुखी हो जाती हैं।

  • आप जिस प्रकार से लोगों की सहायता के लिए सदा तत्पर रहते हैं। ऐसे में आपको पत्नी का कितना सहयोग मिलता है?

मेरी पत्नी कंचन शुक्ला मेरी मां की तरह ही धार्मिक कार्यों में रूचि रखती है और उन्होंने हर कदम पर मेरी सहायता की। जब भी कठिन दौर आया कदम से कदम मिलाकर सदा खड़ी रहीं जिसके कारण ही आज यह मुकाम हासिल हो पाया है।

  • आपकी भविष्य की क्या योजनाएं हैं?

जमीन से जुड़े रहने के कारण हमारा गांव हमें बार-बार अपनी ओर खींचता है। हमारी कोशिश यह है कि गांव में एक ओल्ड एज होम बनवाएं जिससे कि बुजुर्गों की जिंदगी ठीक से व्यतीत हो। ऐसे में बुजुर्गों के लिए काफी भावुक समय तब होता है जब उनको सहायता की जरूरत होती है और उनके लिए अगर कुछ हम कर पाएं तो हमारा जीवन सफल होगा। हमारे पास और भी काफी योजनाएं है। खास तौर पर लाल बत्ती पर भीख मांग रहे बच्चों को शिक्षा देने की योजना जिसपर अभी हम विचार विमर्श कर रहे हैं और जल्द काम शुरू कर देंगे ताकि इन बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो सके। CA akhilesh chandra

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