तीन फिट के गणेश को ऐसे मिला MBBS में एडमिशन

देश के मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए मेडिकल के स्टूडेंटस दिन रात मेहनत करते हैं. वे अपनी पूरी जी-जान लगा देते है NEET, AIPMT, CPMT एवं अन्य मेडिकल परीक्षाओं में पास होने के लिए, ताकि उन्हें एक बेहतर मेडिकल में एडमीशन मिल सके. लेकिन क्या हो अगर कोई छात्र NEET परीक्षा पास कर ले फिर भी कॉलेज उसे एडमीशन देने से इनकार कर दे.

कुछ इस तरह की ही कहानी है गुजरात के भावनगर के रहने वाले 17 वर्षीय गणेश विट्ठल भाई बारैया की जिन्होने NEET परीक्षा में 223 नंबर हासिल किए. लेकिन, फिर भी कॉलेज ने उन्हें एडमिशन नहीं दिया. इसका कारण यह था कि गणेश की हाईट मात्र 3 फीट और उनका वजन मात्र 14 किलो था. इसके साथ ही कांउसिलिंग कमिटी की और गणेश को तर्क दिया गया कि इतनी कम हाइट में आप इमरजेंसी के में ऑपरेशन नहीं कर सकेंगे. mbbs ganesh vithhal gujrat

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साथ ही काउंसलिंग कमिटी ने उन्हें 72% विकलांग भी मान लिया. इसके बाद गणेश इस मामले को लेकर हाईकोर्ट गए और कानून का दरवाजा खटखटाया. इसके बाद इस मामले को लेकर वे सुप्रीम कोर्ट भी गए जहां सुप्रीम कोर्ट ने इस मामलें में फैसला सुनाते हुए गणेश को मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिए जाने का फैसला सुनाया. उच्चतम न्यायालय ने गणेश के मामले में कहा कि महज लंबाई कम होने से किसी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है. किसी भी व्यक्ति की शारीरिक अक्षमता को भी आधार नहीं बनाया जा सकता है.

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने गणेश विट्ठल भाई बारैया को हाल ही में जुलाई 2019 में ही एडमिशन देने के लिए आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गणेश ने भावनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया है और अब वे एक डाक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने की और अपना कदम बढा चुके है. वहीं एक अगस्त को पहली बार जब गणेश अपने कैंपस पहुंचे तो तमाम स्टूडेंट्स ने उनका स्वागत किया.

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इसके पीछे वजह थी उनका संघर्ष जो उन्होंने डॉक्टरी की परीक्षा पास करने के बाद किया. इस परीक्षा में पास होने के बावजूद उन्हें एडमिशन नहीं दिया गया था और उन्होंने अपनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी है. आज वो देश के शायद पहले इतनी कम हाइट और कम वजन के डॉक्टर बनने जा रहे हैं. पहले दिन वो एमबीबीएस में एडमिशन लेने वाले नये बैच के साथ बैठे थे और यहां वो सबसे पहली कतार में बैठे थे.

इसके साथ ही कहा जा रहा है कि सबसे छोटी हाइट के कारण अब उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में लिखा जाएगा. गुजरात के भावनर जिले के पास एक गोरखी गांव में जन्म लेने वाले गणेश विट्ठल भाई बारैया शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहे है. उनके पिता एक किसान है. mbbs ganesh vithhal gujrat

गणेश विट्ठल भाई बारैया शुरू से ही डॉक्टर बनकर अपने परिवार का नाम ऊंचा करना चाहते थे और अब कड़े संघर्ष के बाद वे अपने सपने को पूरा करने की और अपना कदम बढा चुके है. महज 17 साल की उम्र में डॉक्टरी की परीक्षा पास करने वाले गणेश विट्ठल भाई बारैया की कहानी सभी को प्रेरित करने वाली है. आज उनका पूरा परिवार और उनका पूरा गांव उनपर गर्व कर रहै है. mbbs ganesh vithhal gujrat 

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