क्या वायनाड में चलेगा राहुल का जादू ?

केरल में पश्चिमी घाट की गोद में बसे वायनाड के बारे में बताएंगे. अपने आप में प्रकृति की सारी खूबसूरती को समेटे वायनाड, केरल के कन्नूर और कोझिकोड जिलों के बीच स्थित है. अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण वायनाड एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है. पश्चिमी घाट के हरे-भरे पर्वतों के बीच बसे वायनाड की प्राकृतिक खूबसूरती आज भी अपने प्राचीन स्वरूप में बना हुआ है. वायनाड एक बेहतरीन हनीमून स्पाट के रूप में फेमस है.

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देश के नक्शे पर वायनाड का जन्म 1 नवंबर 1980 को हुआ. अपने अस्तित्व में आने के साथ ही यह केरल का बारहवां जिला बना. लेकिन अलग जिला बनने से पहले इसे मायकक्षेत्र के रूप में जाना जाता था. जिसका अर्थ होता है माया की भूमि. वायनाड में एडक्कल की गुफाएं, मीनमुट्ठी जलप्रपात और पुकुट झील जैसे कई पर्यटक स्थल है. पुरातत्व विभाग के मुताबिक करीब 3 हजार साल पहले भी वायनाड अस्तित्व में था. अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और प्राचीन धरोहर के अलावा वायनाड जिले की साक्षरता दर भी काफी अच्छी है.

2011 की जनगणना के मुताबिक वायनाड की जनसंख्या 8,17,420 थी. जिसमें 4,01,684 पुरुष और 4,15,736 महिलाएं थीं. साथ ही यहां का साक्षरता दर 2011 में वायनाड की साक्षरता दर 89.03 फीसदी थी. जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 92.51 प्रतिशत और महिलाओं की सीक्षरता दर 85.70 फीसदी थी. इन सब के साथ ही अपने साथ प्रकृति की खूबसूरत छटा को अपने समेटे वायनाड की शांत वादियां मन को एक अजीब सी शांति की अनुभूति करवाती है.

लेकिन पिछले कुछ दिनों से इन शांत वादियों में चुनावी शोर सुनाई दे रहा है. इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी वायनाड लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में है. राहुल गांधी वायनाड के अलावा अमेठी से भी चुनावी मैदान में है. अब क्योंकि राहुल गांधी वायनाड सीट से चुनावी मैदान में हैं ऐसे में यह सीट प्रदेश की सबसे हाट सीट बन गई है.

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इसलिए यह जानना बेहद अहम हो गया है कि वायनाड लोकसभा सीट का चुनावी गणित क्या है. आपको बता दें कि वायनाड लोकसभा सीट के तहत मनंतावडी, तिरुवंबडी, वानदूर, सुल्तानबथेरी, एरनाड, कलपत्ता और निलंबूर ये कुल सात विधानसभा सीटें आती हैं. इसके अलावा यहां पर 49.48% हिंदू,28.65% मुस्लिम समुदाय और 21.34% ईसाई है. साथ ही यहां अनुसूचित जाति (एससी) करीब 3.99 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (एसटी) 18.53 प्रतिशत है. वायनाड की कुल आबादी में से 96.14 प्रतिशत लोग शहरी इलाकों में और 3.86 प्रतिशत लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं.

वायनाड में कांग्रेस और सीपीएम के बीच चुनावी टक्कर रही है लेकिन इस सीट को कांग्रेस की सुरक्षित सीट माना जाता है. इसका कारण यह है कि 2009 लोकसभा चुनाव में वायनाड में कांग्रेस के एमआई शानवास 4,10,703 वोटो के साथ बड़ी जीत हासिल किया था. जबकि उसके निकटतम प्रतिद्वंदी सीपीआई एम रहमतुल्लाह को सिर्फ 2,57,264 ही मिले थे.

हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के एमआई शानवास     ने 3,77,035 वोट हासिल किया था. जबकि उनके निकटतम सीपीएम के सत्यन मोकेरी ने 3,56,165 वोट हासिल किया था. जबकि भाजपा के पीआर रस्मिलनाथ को सिर्फ 80,752. 2014 के लोकसभा चुनाव में खास बात यह रही कि इस बार इस सीट पर कांग्रेस 2009 के मुकाबले महज 20,870 वोटों के अंतर से ही जीत हासिल हुई थी.

ऐसे 2019 लोकसभा चुनाव में खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को उतारकर पार्टी इस सीट को सुरक्षित रखना चाहती है. वहीं इस बार राहुल गांधी को टक्कर देने के लिए बिभिन्न पार्टियों के 20 उम्मीदवार मैदान में हैं. जानकारों की माने तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को यहां सीपीएम से कड़ी टक्कर मिल सकती है. लेकिन कांग्रेस इस बार वायनाड सीट को सुरक्षित रख पाती है या सीपीएम यहां पर कमबैक करती है यह तो 23 मई को रिजल्ट आने  के बाद ही पता चल पाएगा. 

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