अब बेड पर देना होगा जन्म प्रमाणपत्र, व्हाट्सएप पर भेजना होगा फोटो

-सिविल सर्जन ने जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के प्रभारियों को किया पत्र जारी
-इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करने का दिया निर्देश, होगी कार्रवाई
  भागलपुर, 24 मई-
प्रसव के बाद प्रसूताओं को नवजातों का जन्म प्रमाणपत्र लेने के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा, बल्कि अस्पताल से छुट्टी के वक्त ही उन्हें दे दिया जाएगा। इसे लेकर सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा ने जिले के सभी अस्पतालों के प्रभारियों को पत्र जारी करते हुए निर्देश जारी किया है। उन्होंने पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रसूता को जब प्रसव के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज किया जाए तो उसी वक्त नवजात के जन्म प्रमाण पत्र दे दें। साथ ही इसका फोटों खींचकर व्हाट्सएप भी करें। इसमें कोई लापरवाही नहीं चलेगी।
सिविल सर्जन डॉ. शर्मा ने कहा कि लोगों की सुविधा का ध्यान रखते हुए यह निर्देश जारी किया गया है। ऐसा कई बार देखा जाता है कि प्रसव के बाद नवजात को जन्म प्रमाणपत्र के लिए अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। अस्पताल में अगर प्रसव होता है तो सारा रिकॉर्ड मौजूद रहता है, इसलिए इसमें देरी नहीं होनी चाहिए। आमलोगों को किसी तरह की कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए यह निर्देश जारी किया गया है।
निर्देश के पालन को लेकर की जाएगी निगरानीः पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि प्रसूताओं को अस्पताल से छुट्टी देते वक्त नवजातों को प्रमाणपत्र मिल रहा है कि नहीं, इसे लेकर निगरानी भी की जाएगी। निगरानी में किसी तरह की लापरवाही हुई तो अस्पताल के प्रभारी या फिर उपाधीक्षक जिम्मेदार होंगे। इसलिए इस व्यवस्था को सही तरीके से लागू करने में अस्पताल के प्रभारी या फिर उपाधीक्षक अपनी भूमिका निभाएं।
व्यवस्था को लगातार किया जा रहा सुदृढ़ः सदर समेत जिले के सभी अस्पतालों की व्यवस्था को आमलोगों के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए सिविल सर्जन डॉ. उमेश कुमार शर्मा लगातार प्रयास कर रहे हैं। जिले के अस्पतालों का लगातार दौरा कर रहे हैं। वहां की व्यवस्थाओं का लगातार जायजा ले रहे हैं। अगर अस्पताल में किसी तरह की कमी रहती तो उसे सुदृढ़ करने का निर्देश देते हैं। इसके बावजूद भी अगर किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई भी कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था बेहतर होती जा रही है। डॉक्टर समय से अस्पताल पहुंच रहे हैं। जो डॉक्टर समय पर ओपीडी में नहीं रहते हैं उस पर कार्रवाई से भी नहीं हिचकते हैं।

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