कालाजार उन्मूलन को लेकर ग्रामीण चिकित्सकों को दिया गया प्रशिक्षण 

– सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार हाॅल में प्रशिक्षण 
– कालाजार उन्मूलन के लिए कारण, लक्षण, बचाव एवं उपचार की दी गई जानकारी 

शेखपुरा, 28 फरवरी-

कालाजार उन्मूलन अभियान को पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए सोमवार को सिविल सर्जन डाॅ पृथ्वीराज की अध्यक्षता में उनके ही कार्यालय परिसर स्थित सभागार कक्ष में प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसमें जिले के ग्रामीण चिकित्सकों को कालाजार से संबंधित एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी सह मास्टर ट्रेनर डाॅ अशोक कुमार सिंह एवं वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी श्याम सुंदर कुमार द्वारा ग्रामीणों को चिकित्सकों को दिया गया। प्रशिक्षण में मौजूद ग्रामीण चिकित्सकों को कालाजार के लक्षण, कारण, बचाव एवं उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई। ताकि प्रशिक्षण प्राप्त ग्रामीण चिकित्सक कालाजार से संबंधित मरीजों की आसानी से शुरुआती दौर में ही पहचान कर सकें और मरीजों को उचित इलाज के लिए आवश्यक जानकारी सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध करा सकें। साथ ही सामुदायिक स्तर पर लोगों को इस बीमारी से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी देते हुए बेहतर तरीके से जागरूक कर सकें। इस प्रशिक्षण में वीबीडीएस मनोज कुमार, केबीसी अभिषेक कुमार आदि मौजूद थे। 

– संक्रमित मरीजों को सहयोग करने पर ग्रामीणों चिकित्सकों को प्रति मरीज मिलेंगे 500 रुपये : 
सिविल सर्जन डाॅ पृथ्वीराज ने बताया, प्रशिक्षण प्राप्त ग्रामीण चिकित्सकों को संक्रमित मरीजों को सहयोग करने पर प्रति मरीज 500 रुपये दिए जाएंगे। यह लाभ वैसे चिकित्सकों को मिलेगा, जो मरीजों की पहचान कर समुचित इलाज के लिए उन्हें सरकारी स्वास्थ्य संस्थान भेजेंगे और इस दौरान मरीजों को आवश्यक सहयोग करेंगे। प्रशिक्षण के दौरान मौजूद सभी चिकित्सकों को इसकी विस्तृत जानकारी दी गई है। 

– लक्षण वाले मरीजों को जाँच के लिए नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान भेजने में करेंगे सहयोग : 
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी सह मास्टर ट्रेनर डाॅ अशोक कुमार सिंह ने बताया, ग्रामीण चिकित्सक अपने क्षेत्र के लक्षण वाले मरीजों को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में जाँच कराने के लिए प्रेरित करेंगे। ताकि ससमय उन्हें बीमारी की सही जानकारी मिल सके और उचित इलाज शुरू हो सके। इसके अलावा ऐसे मरीजों को जाँच कराने में किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो, इसके लिए ग्रामीण चिकित्सक नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान पहुँचने में भी सहयोग करेंगे। साथ ही ऐसे मरीजों को चिह्नित कर स्थानीय पीएचसी को भी जानकारी उपलब्ध करेंगे। इससे ना सिर्फ ऐसे मरीजों का समय पर जाँच और सही बीमारी की जानकारी सुनिश्चित होगी। बल्कि, मरीजों को गंभीर परेशानियाँ का भी सामना नहीं करना पड़ेगा और सुविधाजनक तरीके से आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध करायी जाएगी। 

– कालाजार के लक्षण :
– लगातार रुक-रुक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना। 
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है।
– प्लीहा में नुकसान होता है।

– छिड़काव के दौरान इन बातों का रखें ख्याल : 
– छिड़काव के पूर्व घर की अन्दरुनि दीवार की छेद/दरार बंद कर दें।
– घर के सभी कमरों, रसोई घर, पूजा घर, एवं गोहाल के अन्दरुनि दीवारों पर छः फीट तक छिड़काव अवश्य कराएं । छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करें।
– छिड़काव के पूर्व भोजन सामग्री, बर्तन, कपड़े आदि को घर से बाहर रख दें।
– ढाई से तीन माह तक दीवारों पर लिपाई-पोताई ना करें, जिसमें कीटनाशक (एस पी) का असर बना रहे।
– अपने क्षेत्र में कीटनाशक छिड़काव की तिथि की जानकारी आशा दीदी से प्राप्त करें।

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