प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र असरगंज में एएनएम और आशा दीदी को दी गयी सुरक्षित गर्भपात की जानकारी

  • असुरक्षित गर्भपात के चिकित्सकीय समाधान पर हुई चर्चा
  • कोरोना काल मे सुरक्षित गर्भसमापन कराने में हुई समस्या
  • एमटीपी एक्ट के अनुसार 20 सप्ताह तक ही कराया जा सकता है गर्भ का समापन

मुंगेर, 12 अगस्त 2021 : कोरोना काल में गर्भवती महिलाओं को कई तरह के समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिसमें सुरक्षित गर्भपात भी एक चुनौती रहा। इसको ले जिले के असरगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम, आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को आईपास डेवलपमेंट फाउंडेशन के रिसर्च एंड ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर अर्पणा ने सुरक्षित गर्भ समापन और कानून के बारे में विस्तृत जानकारी के साथ सही तरीके से गर्भपात को लेकर चर्चा की। इस कार्यक्रम में लगभग 45 एएनएम, आशा और आशा फैसिलिटेटर ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर्णा ने बताया कि कोरोना के समय में लोगों को कई विषम परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। इस दौरान कई ऐसी महिलाएं है जो अनचाहे रूप से गर्भवती हो गई। संक्रमण के मद्देनजर वह अपना सुरक्षित रूप से गर्भपात भी नहीं करा सकी। सरकारी अस्पतालों में व्याप्त चिकित्सकीय सुविधा का लाभ से वह वंचित रह गई। लिहाजा उन महिलाओं का गर्भ अब 2 से 3 माह का हो चुका है। इसलिए उनका सुरक्षित रूप से चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है। ताकि उनका सुरक्षित रूप से गर्भ समापन किया जा सके। इसे लेकर सभी को प्रयास करने की आवश्यकता है। खासकर सामाजिक स्थिति में इसको लेकर जागरूकता लानी होगी। इस प्रशिक्षण में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. ललन प्रसाद, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक विश्वरंजन कुमार, सीडीपीओ विभा कुमारी, डीएस शिवानी कुमारी, एलएस शरारा कुमारी, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर अमन कुमार और डीईओ रोशन कुमार सहित कई अन्य लोग मौजूद थे।

20 सप्ताह तक के गर्भ को कानूनी रूप से समाप्त करने की है इजाज़त:

एमटीपी ( मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेगनेंसी) एक्ट 1971 में निहित कुछ निहित शर्तों के तहत कोई भी महिला 20 सप्ताह तक के गर्भ को कानूनी रूप से हटा सकती है। लेकिन एमपीटी एक्ट में कुछ शर्तों का जिक्र किया गया है। जिसका अनुपालन अनिवार्य है तथा इसे लेकर जरूरी दस्तावेज होनी चाहिए। लेकिन इस दरमियान ख्याल रखना होगा कि उनका सुरक्षित रूप से गर्भपात हो सके। इसके लिए उनके परिजनों को खास ध्यान रखने की आवश्यकता है। किसी भी बिचौलियों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। किसी तरह की समस्या होने पर निकट के सरकारी अस्पताल में संपर्क करना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में निशुल्क रूप से कानूनी रूप से गर्भपात कराने की सुविधा उपलब्ध है। इस दौरान विशेष परिस्थिति होने पर एंबुलेंस की मदद से महिला मरीज को नि:शुल्क रूप से हायर सेंटर भेजने की सरकारी सुविधा उपलब्ध है , लोगों को इसका लाभ लेना चाहिए। 20 सप्ताह तक गर्भ समापन कराना वैध है लेकिन 12 सप्ताह के अंदर एक प्रशिक्षित डॉक्टर एवं 12 सप्ताह से ऊपर तथा 20 सप्ताह के अंदर तक में 2 प्रशिक्षित डॉक्टर की उपस्थिति में सदर अस्पताल या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पताल में प्रशिक्षित डॉक्टर की मौजूदगी में गर्भपात होनी चाहिए। इस दौरान माहवारी के समय साफ -सफाई के संबंध में भी विस्तृत जानकारी दी गयी।

असुरक्षित गर्भपात से 8 प्रतिशत महिलाओं की हो जाती मौत:
भारत में होने वाली मातृ मृत्यु में से लगभग 8% मृत्यु असुरक्षित गर्भपात के कारण होती है। यदि किसी महिला को माहवारी के दिन चढ़ गए हो या उससे अनचाहे गर्भ के ठहरने की आशंका हो तो उसे बिना किसी देरी के नजदीकी आशा एएनएम से संपर्क करना चाहिए या डॉक्टर को दिखाना चाहिए अगर गर्भधारण की पुष्टि होती है और महिला गर्भ नहीं रखना चाहती है तो उसे गर्भपात का निर्णय जल्दी ले लेना चाहिए अगर गर्भ 9 सप्ताह तक का हो तो गोलियों द्वारा गर्भपात भी किया जा सकता है। गर्भपात जितना जल्दी कराया जाए उतना ही सरल और सुरक्षित होता है। कई बार ऐसा हो सकता है कि गर्भपात सेवाएं लेने के लिए पहुंचने तक गर्भ 12 हफ्ते से ऊपर का हो इसके पीछे बहुत से कारण हो सकते हैं – जैसे कि गर्भ की जानकारी बाद में लगना होने वाले शिशु में जन्मजात विकृति होना अस्पताल समय से ना पहुंच पाना। सुरक्षित गर्भपात के मद्देनजर समय पर निर्णय न ले पाना इत्यादि। यदि महिला 12 हफ्ते या 3 महीने से ज्यादा अवधि के गर्भ का गर्भपात करवाना चाहती है तो उसमें उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। 20 सप्ताह तक गर्भपात से जुड़ी सेवाएं लेने के लिए महिला को बड़े अस्पताल जैसे कि जिला अस्पताल 24 × 7 उपलब्ध सीएससी तथा मेडिकल कॉलेज अस्पताल जाना होगा। गर्भावस्था की अवधि के आधार पर महिला को इन सेवाओं के लिए अस्पताल में भर्ती किया जाता है। महिलाओं को ध्यान रखना चाहिए कि वह गर्भपात के साथ तुरंत ही किसी गर्भनिरोधक साधनों का उपयोग शुरू कर दें। क्योंकि गर्भपात और अगले गर्भधारण के बीच में कम से कम 6 महीने का अंतर रखना उचित होता है।

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