राज्य

बच्चों में पोषण के स्तर में सुधार को ले जिलाभर में पोषण पखवाड़ा का आयोजन 

– कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उन्हें सुपोषित करना पखवाड़ा का मुख्य उद्देश्य 

– आंगनबाड़ी केंद्रों पर शिशुओं के विकास व पोषण के स्तर की होगी जांच 

मुंगेर, 25 मार्च-
जिलाभर में कुपोषण के मामलों में कमी लाने के उद्देश्य से 21 मार्च से 4 अप्रैल तक पोषण पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष पखवाड़ा में 0 से 06 साल के बच्चों में पोषण के स्तर में सुधार को लेकर विभिन्न स्तरों पर जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। भारत सरकार के महिला व बाल विकास मंत्रालय से प्राप्त दिशा- निर्देश के आलोक में पोषण संबंधी परिणाम में सुधार का प्रयास अभियान का मुख्य उद्देश्य है। इस क्रम में 0 से 6 साल के बच्चों में पोषण की स्थिति की जांच करते हुए कुपोषित बच्चों को चिह्नित करते हुए पोषण परामर्श केंद्र के माध्यम से उन्हें सुपोषित किये जाने का प्रयास किया जाना है। 

कुपोषण के मामलों में कमी लाना पखवाड़ा का उद्देश्य : 
पोषण पखवाड़ा से संबंधित जानकारी देते हुए डीपीओ आईसीडीएस वन्दना पांडेय ने बताया कि उचित पोषण के प्रति आम लोगों को जागरूक करते हुए कुपोषण के मामलों में कमी लाना पखवाड़ा का मुख्य उद्देश्य है। इसके लिये आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 0 से 06 वर्ष के बच्चों के पोषण स्तर की जांच की जायेगी। इस दौरान कुपोषित बच्चों को चिह्नित करते हुए उन्हें सुपोषित किये जाने को लेकर जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों की हो रही जांच संबंधी रिपोर्ट प्रतिदिन जिलाधिकारी को अवगत कराते हुए आईसीडीएस पोषण ट्रैकर एप पर अपलोड किया जा रहा है। इस दौरान विभिन्न स्तरों पर जागरूकता संबंधी कार्यक्रम आयोजित करते हुए आम लोगों को उचित पोषण संबंधी जानकारी भी उपलब्ध करायी जा रही है। ताकि वे अपने घर के बच्चों का उचित पोषण सुनिश्चित करा सकें। 

उन्होंने बताया कि पोषण पखवाड़ा में स्वस्थ्य बच्चे की पहचान, समुदाय स्तर पर पोषण के प्रति लोगों को जागरूक करने, एनीमिया की रोकथाम, पारंपरिक भोजन के जरिये उचित पोषाहार की प्राप्ति सहित अन्य विषयों पर आंगनबाड़ी केंद्र स्तर से समुदाय के लोगों को प्रेरित व जागरूक किये जाने को लेकर प्रयास किये जा रहे हैं। 

उचित पोषण के प्रति लोगों में जागरूकता लाने का हो रहा प्रयास : 
उन्होंने बताया कि पोषण पखवाड़ा के तहत सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर उम्र के हिसाब से बच्चों कि वृद्धि की समुचित निगरानी की जा रही है। बच्चों का वजन, लंबाई की माप करते हुए इसे पोषण ट्रैकर एप पर अपलोड किया जा रहा है। इसी तरह जल संरक्षण के उपायों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से जागरूकता संबंधी कार्यक्रम आयोजित किया जाना है। इसके साथ ही केंद्र व समुदाय स्तर पर वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट की स्थापना को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जायेगा। विभिन्न स्तरों पर बैठक व गोष्ठी आयोजित कर एनीमिया से बचाव के प्रति लोगों को जागरूक किया जाना है। सेविकाओं के जरिये स्थानीय महिलाओं को भी बेहतर पोषाहार के उपयोग के लिये प्रेरित किया जा रहा है। ताकि गर्भवती व धात्री महिलाओं के साथ-साथ कम उम्र के बच्चों में पोषण की स्थिति में सुधार लाया जा सके।

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