बांका जिले में परिवार नियोजन को लेकर लोगों को किया जा रहा जागरूक

-रविवार को शुरू हुआ परिवार स्थिरीकरण पखवाड़ा 31 जुलाई तक चलेगा
-सभी प्रखंडों के लोगों में परिवार नियोजन की सामग्री का हो रहा वितरण

बांका, 13 जुलाई-

जिले में अभी जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा चल रहा है। 11 जुलाई को शुरू हुआ पखवाड़ा 31 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान आशा कार्यकर्ता क्षेत्र में घूम-घूमकर लोगों को परिवार नियोजन के लिए जागरूक कर रही हैं। क्षेत्र के लोगों के बीच परिवार नियोजन से संबंधित सामग्री कंडोम, टैबलेट इत्यादि का वितरण कर रही हैं। आशा कार्यकर्ता लोगों को परिवार नियोजन से संबंधित नुस्खे बताकर इसके फायदे बता रही हैं। जिले के सभी प्रखंडों में परिवार नियोजन को लेकर जागरूकता अभियान को लेकर प्रचार-प्रसार चलाया जा रहा है।
जिले भर में जागरूकता अभियान चल रहा है-
एसीएमओ डॉ. अभय प्रकाश ने बताया कि जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा के तहत जिले भर में जागरूकता अभियान चल रहा है। लोगों को छोटा परिवार होने के फायदे बताए जा रहे हैं। साथ ही परिवार छोटा रखने के लिए क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी दी जा रही है। परिवार नियोजन सामग्री के प्रति अगर किसी के मन में कोई भ्रम है तो उसे दूर किया जा रहा है। क्षेत्र के लोगों को आशा कार्यकर्ता समझा रही हैं कि कंडोम या टैबलेट के इस्तेमाल से कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। इसलिए परिवार नियोजन में इन सामग्रियों का इस्तेमाल बिना किसी झिझक के कर सकते हैं।
दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल जरूरीः क्षेत्र में दौरा करने के दौरान आशा कार्यकर्ता लोगों को दो बच्चे के बीच तीन साल का अंतराल रखने के लिए कहती और इसके फायदे गिनाती हैं। लोगों को समझाया जाता है कि अगर आप दो बच्चों के बीच तीन साल का अंतराल रखते हैं तो जच्चा और बच्चा, दोनों स्वस्थ रहता है। बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। भविष्य में उसके किसी गंभीर बीमारी की चपेट में आने की आशंका कम रहती है। अगर बीमारी की चपेट में आ भी गए तो वह उससे जल्दी उबर जाता है। इसके अलावा छोटा परिवार रखने से आर्थिक स्वतंत्रता भी रहती है, जिससे बच्चे का लालन-पालन सही तरीके से किया जाता है। इन सब फायदों के बारे में आशा कार्य़कर्ता क्षेत्र के लोगों को बता रही हैं।
योग्य दंपतियों की हो रही काउंसिलिंगः केयर इंडिया के डीटीएल डॉ. तौसीफ कमर ने बताया कि क्षेत्र के लोगों को परिवार नियोजन के बारे में जानकारी दी जा रही है। साथ ही इसके संसाधन भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। एक बच्चे वाले दंपति की काउंसिलिंग की जा रही है। उन्हें दूसरे बच्चे के बीच उचित अंतराल रखने के लिए कहा जा रहा है। इसके अलावा सभी प्रखंडों में लोगों को परिवार नियोजन के लिए जागरूक किया जा रहा है। लोगों को परिवार नियोजन का सही समय बताया जा रहा है। प्रचार-प्रसार के दौरान अगर दो बच्चे वाले दंपति मिल जाते हैं तो उसे ऑपरेशन के लिए राजी किया जाता।

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