भविष्य का रास्ता वर्तमान से ही होकर गुजरता है: डॉ. अजय

• फेयरगेज़ के कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को कैरियर चुनाव की बारीकियों से कराया अवगत
• भविष्य को संवारने के दिए कई जरुरी टिप्स
• बेहतर भविष्य के लिए वर्तमान समय के सदुपयोग पर दिया बल

पटना:
‘‘क्या मुझे फ़ैशन डिजाइनर का कोर्स करना चाहिए? क्या मैं एक सफ़ल चिकित्सक बन सकता हूँ? मेरे लिए सबसे बेहतर कैरियर क्या होगा’’। ऐसे कई सवालों का सहजता एवं विस्तारपूर्वक उत्तर दे रहे थे डॉ. अजय कुमार सिंह। मौका था स्कूली बच्चों के कैरियर चुनाव की मुश्किलों को दूर करने के लिए फेयरगेज़ द्वारा आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम। स्कूली बच्चों के बीच काम करने वाली संस्था फेयरगेज़ के कार्यक्रम में बच्चों को संबोधित करते हुए डॉ. अजय ने बच्चों को अपने भविष्य सुरक्षित और सुनिश्चित करने के विषय में कई जरुरी टिप्स दिए। ज्ञात हो कि डॉ. अजय नई दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के टेकनिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस स्टडीज़ में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।दूसरी तरफ वह कई सोशल प्लेटफार्म के जरिए युवाओं की शैक्षणिक, व्यक्तिगत एवं मानसिक विकास करने में भी जुटे हैं। ‘डॉ. अजय स्पीक्स’ नाम से उनका यू-ट्यूब चैनल भी है, जो युवाओं के बीच काफी तेजी से लोकप्रिय भी हो रहा है।

कैरियर के विकल्पों को सीमित न करें, सफ़लता के चार सूत्रों को रखें याद:

डॉ. अजय ने बताया कि केवल डॉक्टर, इंजीनियर और आइएस ही करियर विकल्प नहीं है। इसके अलावा कई ऐसे विकल्प हैं जो भविष्य में बच्चों को पद, प्रतिष्ठा, पैसा और पहचान दे सकते हैं। जानकारी के अभाव में बच्चो को कुछ पारंपरिक रास्तों पर ही चलने को बाध्य होना पड़ता है। बच्चों से ज्यादा अभिभावक को करियर के विभिन्न विकल्पों के लिए रिसर्च करना होगा और जानकारी लेनी होगी। उन्होंने सफ़लता के लिए चार सूत्रों को उपयोगी बताया। जिसमें उन्होंने खुद को स्वीकार करने, खुद को जानने, खुद की रचना करने एवं स्वयं से साक्षात्कार करने को सफ़ल होने के लिए जरुरी बताया।

ख़ुद को स्वीकार कर स्वयं की शक्ति की पहचान करना जरुरी:

डॉ. अजय ने बताया कि खुद को स्वीकार करना सबसे पहला रास्ता है। खुद को स्वीकारना मतलब खुद की अच्छाइयों को भी जानना तथा खुद की बुराइयों को भी जानना है। इस तरह एक छात्र अपनी मजबूती और कमजोरी से रूबरू हो जाता है। एक बार जब छात्र को अपने बारे में पता चल जाता है उसके बाद वह खुद का सृजन शुरू कर देता है। अपनी अच्छी आदतों को और मजबूत करता है। ज्यादा समय देता है। वही बुरी आदतों से दूरी बनाना शुरू कर देता है। धीरे-धीरे समय के साथ उसकी जो बुरी आदतें होती है वह भी बदलकर अच्छी आदतों में तब्दील हो जाती है। इस तरह व्यक्ति अपना रचनाकार खुद बन जाता है।

खुद को निर्मित करने के बाद स्वयं से साक्षात्कार है मुमकिन:
डॉ. अजय ने कहा कि एक बार जब व्यक्ति अपनी रचना खुद कर लेता है उसके बाद सफलता के तमाम मापदंड को हासिल करने में सक्षम होता है। खुद का विकास करना मतलब अपने साथ परिवार, समाज और देश का विकास करना है। एक बार जब व्यक्ति हर क्षेत्र में मनचाहा विकास प्राप्त कर लेता है तो अगला पड़ाव खुद से साक्षात्कार करना होता है। मतलब हम खुद को बताते हैं जो हमने सोचा था वह हमने प्राप्त किया। अपने करनी पर गर्व की अनुभूति करना है।

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