वरिष्ठ साहित्यकार और उपनिदेशक गुरमीत बेदी ने दीप्ति के कविता संग्रह की सराहना की

संवदेनशील कवयित्री हैं दीप्ति अंगरीश : गुरमीत बेदी

चंडीगढ़-
हिमाचल प्रदेश सूचना एंव जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक और वरिष्ठ साहित्यकार गुरमीत बेदी ने पत्रकार-लेखिका दीप्ति अंगरीश की पहली कविता संग्रह ‘एडल्ट चुस्कियां’ की सराहना की। हिमाचल भवन में लेखिका से मुलाकात के दौरान गुरमीत बेदी ने कहा कि दीप्ति की रचनाओं में झरनों जैसा आंतरिक संगीत भी है और नदियों जैसी रवानगी भी है। उनकी हर कृति सुर ताल में होती है और यही उनकी रचनाओं की सबसे बड़ी ताकत है। जीवन का यथार्थ भी उनकी रचनाओं में झलकता है और अनुभव भी। उनकी रचनात्मक दृष्टि का कैनवस बहुत बड़ा है और शब्दों का भंडार भी लाजवाब है। अपनी कई रचनाओं में उन्होंने प्रकृति को भी बिम्ब बनाकर इस्तेमाल किया है और ऐसे बिम्ब बहुत जीवंत बन पड़े हैं। अपनी कई रचनाओं में उन्होंने बादलों, नदियों और घटाओं को प्रतीक बनाकर अपनी बात कही है और इससे उनकी रचनाओं की ताकत और बढ़ गई है।

वरिष्ठ साहित्यकार गुरमीत बेदी ने कहा कि कोई लेखक दिल्ली से इतनी दूर की यात्रा करके मुझसे मिलने आए और अपनी पुस्तक भेंट करें, यह उसकी संवेदशीलता और सरोकार को दर्शाता है। जिस आत्मीयता के साथ वो मिलने आई और पुस्तक भेंट की, वह काबिलेतारीफ है। उन्होंने कहा कि आम जीवन की संवदेनशीलता दीप्ति की कविताओं में भी दिखता है। इनकी रचनाओं में वैचारिक टकराव नहीं है बल्कि संवेदनशीलता के धरातल पर की रचनाएं बहुत देर तक मानस पटल पर अपना प्रभाव छोड़ती हैं।

वहीं, कवयित्री दीप्ति अंगरीश ने कहा कि जिस प्रकार से अपनी एक सरकारी मीटिंग को उपनिदेशक गुरमीत बेदी ने केवल मेरे लिए कुछ घंटों के लिए छोड़ा और उना से चंडीगढ़ आए और दोबारा उना गए, यह दिखातार है कि वे अपने वादों के कितने पक्के हैं। पहले उनकी रचनाओं को लेकर उनकी इज्जत करती रही हूं, इस मुलाकात के बाद मेरे लिए उनकी प्रतिष्ठा और अधिक बढ़ गई है। दीप्ति अंगरीश ने कहा कि आमतौर पर बड़े लोग नौसिखिए को इतनी तवज्जो नहीं देते हैं, लेकिन उना से केवल मेरे लिए चंडीगढ़ के हिमाचल भवन तक आना, बहुत बड़ी बात है।

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