सुरक्षित तरीके से स्कूल संचालन से बच्चों की शिक्षा व मानसिक स्वास्थ्य की होगी भरपाई 

• घर और विद्यालय में बच्चों से नियमित संवाद करने की है जरुरत- डॉ. एन.के.सिन्हा 

• मास्क, हाथों की स्वच्छता, दूरी, टीकाकरण और संवेदनशीलता जरुरी 

• 60 प्लस लोगों के लिए प्रिकॉशन डोज जरुरी- डॉ. राजेश वर्मा 
• विश्व में कोरोना संक्रमण के प्रभाव से 6 करोड़ से अधिक शिक्षक मानसिक रूप से प्रभावित 

पटना/ 8 फ़रवरी-
यूनिसेफ द्वारा आयोजित “आस्क द डॉक्टर” वेबिनार श्रृंखला में आज मंगलवार को शिक्षक/शिक्षिकाओं के कोरोनाकाल में मानसिक स्वास्थ्य के महत्त्व पर वेबिनार में चर्चा की गयी. 

वेबिनार में राज्य के बिहार एजुकेशन प्रोजेक्ट काउंसिल से जुड़े सरकारी एवं निजी स्कूलों के शिक्षकों-शिक्षिकाओं ने वेबिनार में भाग लिया .. 

यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान के तत्वावधान में आयोजित वेबिनार में प्रतिभागियों ने कोरोनाकाल में मानसिक समस्याओं का जिक्र किया और चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों से अपने सवाल के जवाब पाये. 

घर और विद्यालय में बच्चों पर नजर रखने की है जरुरत- डॉ. एन.के.सिन्हा 
वेबिनार को संबोधित करते हुए राज्य प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. एन.के.सिन्हा ने बताया कि संक्रमण के दौरान घरों में लगातार रहने से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव देखा जा रहा है. बच्चे ज्यादा तनावग्रस्त और चिढ़चिढ़े हो गए हैं और शिक्षकों एवं अभिभावकों को बच्चों से संवाद बनाये रखने की जरुरत है. शिक्षकों को अपने छात्रों के सामने खुद एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने की जरुरत है जिससे बच्चे नकारात्मक सोच से बच सकें. एक सवाल के जवाब में डॉ. सिन्हा ने बताया कि अभी 15 से 17 वर्ष के आयुवर्ग के किशोरों को कोवेक्सिन की डोज दी जा रही है और ऐसा इसलिए है क्यूंकि बाकी टीकों पर अभी बच्चों पर प्रभाव को लेकर अभी शोध जारी है. अभी 15 से 17 आयुवर्ग के करीब 40 फीसदी बच्चों का टीकाकरण होना बाकी है.

60 प्लस लोगों के लिए प्रिकॉशन डोज जरुरी- डॉ. राजेश वर्मा
वेबिनार को संबोधित करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ. राजेश वर्मा ने बताया कि 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए प्रिकॉशन डोज लेना बहुत जरुरी है. खासकर ऐसे लोग जो किसी गंभीर रोग से ग्रसित हैं वे अपने चिकित्सक की सलाह लेकर बूस्टर डोज का टीका जरुर लगवाएं. हर स्कूल के शिक्षक ये सुनिश्चित करें की उनके संस्थान के 15 वर्ष से ऊपर के सभी विद्यार्थी पूरी तरह से टीकाकृत हों. साथ ही स्कूल के सभी शिक्षक और स्टाफ भी टीका ले चुके हों. 

स्कूल प्रबंधन को कोविड अनुरूप आचरण अपने संसथान में सुनिश्चित करने की जरुरत है. सुबह प्रार्थना के समय स्कूल प्रबंधन को बच्चों को सही तरीके से मास्क पहनने एवं स्वच्छता के पालन के लिए प्रेरित करें. वंचित समूहों के बच्चों जिनका किसी भी कारण अभी तक टीकाकरण नहीं हुआ उन्हें जल्द से जल्द सबके सहयोग से टीकाकृत करने की जरुरत है. स्कूलों में मास्क, हाथों की स्वच्छता, दूरी, टीकाकरण और संवेदनशीलता पर ध्यान देना जरुरी है.    

शिक्षक हैं बच्चे और उनके अभिभावक के बीच के सेतु- डॉ. राजेश कुमार
डॉ. राजेश कुमार, विभागाध्यक्ष, मानसिक स्वास्थ्य विभाग, इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान ने वेबिनार में अपने संबोधन में बताया कि अनजाने डर और घबराहट महसूस करना मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से अनुकूल नहीं है. कोरोना महामारी एक अदृश्य शत्रु है जिससे हिम्मत रखकर ही लड़ा जा सकता है. मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से निपटने के लिए हर स्तर पर सामूहिक प्रयास की जरुरत है. पूरे विश्व के 6 करोड़ से अधिक शिक्षक कोरोनाकाल में मानसिक रूप से किसी न किसी तरह प्रभावित हुए हैं. 

निपुण गुप्ता, यूनिसेफ़ की रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए  बताया कि पूरे विश्व में कोरोना संक्रमण – लाक्डाउन से 1.60 करोड़ बच्चों की पढाई रुक गयी थी और यह उनके शिक्षा में बहुत बड़ा अवरोधक साबित हुआ है. इससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य एवं पूरे स्वस्थ जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और सरकार को इसपर तत्काल ध्यान देने की जरुरत है.  

इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान की क्लिनिकल साइकोलोजिस्ट डॉ. प्रिया कुमार, यूनिसेफ के डॉ. सिद्धार्थ रेड्डी एवं एनी ने वेबिनार में अपनी बातें रखी और प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देकर उन्हें संतुष्ट किया. वेबिनार का संचालन निपुण गुप्ता, संचार विशेषग्य, यूनिसेफ एवं डॉ. सरिता वर्मा, हेल्थ ऑफिसर, यूनिसेफ ने किया. यूनिसेफ की शिक्षा विशेषग्य डॉ. पुष्पा जोशी ने प्रतिभागियों एवं चिकित्सकों तथा विशेषज्ञों को धन्यवाद ज्ञापित किया

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