बच्चों के पास नहीं करने दें किसी को धूम्रपान, फेफड़ों को पहुंचाता है नुकसान

बौद्धिक विकास को भी करता है प्रभावित

भागलपुर, 13 अक्टूबर

सरकार द्वारा तमाम जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद लोग धूम्रपान की आदत छोड़ नहीं रहे हैं. यह आदत न सिर्फ उस व्यक्ति के लिए, बल्कि उसके आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी नुकसान पहुंचा रहा है. बच्चों पर तो इसका खासा असर पड़ता है. बच्चों के पास धूम्रपान करने से जो धुआं उनके अन्दर जाता है, वह उनके फेफड़ों को काफी नुकसान पहुंचाता है. साथ ही बौद्धिक विकास को भी रोकता है.
निजी चिकित्सक डॉ. विनय कुमार झा कहते हैं धूम्रपान कई बीमारियों की जड़ हैं. इसका नुकसान पीने वालों के साथ पास में रहने वालों को भी होता है. बच्चों के लिए तो यह बहुत ही नुकसानदायक है. बच्चों के आसपास धूम्रपान करने से उसपर गहरा असर पड़ता है. उसका फेफड़ा संक्रमित होने का खतरा रहता है. साथ ही उसके बौद्धिक विकास पर भी इसका असर पड़ता है. साथ ही बच्चों में सांस की बीमारियां जैसे दमा, ब्रोंकाइटिस और न्यूमोनिया का जोखिम बढ़ाता है. इसलिए बच्चों के आसपास धूम्रपान नहीं करें. अगर संभव हो तो धूम्रपान को ही छोड़ दें.

याद्दाश्त को करता है कमजोर:
डॉ. विनय कहते है सिगरेट से निकलने वाले धुंआ दिमाग के उस हिस्से पर असर करता है, जहां से बच्चा सांस लेता है. दूसरों के धूम्रपान के धुंऐ से बच्चों की पढ़ने-लिखने की आदत पर असर पड़ता है. उनकी समझबूझ और याद्दाश्त को कमजोर करता है. इसलिए बच्चों के सामने हर हाल में धूम्रपान करने से बचना चाहिए.

धुएं से नींद आती है कम:
डॉ. विनय कहते है धूम्रपान करने से धुआं घर की चीजों में बस जाता है और बच्चों में घबराहट, खांसी और बलगम की शिकायत होने लगती है. इसका असर काफी समय तक रहता है. धूम्रपान के धुएं से नींद कम आती है. कान और कान के पर्दे के बीच संक्रमण का खतरा रहता है. बच्चों के गले की धमनियों को नुकसान पंहुचाता है, जो सिर और गले में ऑक्सीजनयुक्त खून को ले जाती हैं.

हाथों पर चिपक जाता है निकोटिन का समूह:
डॉ. विनय कहते है धूम्रपान करते वक्त तंबाकू के धुएं में मौजूद निकोटीन का समूह हवा में तैरता हुआ बच्चों के हाथों पर जाकर चिपक जाता है. ये कीटाणु हाथों पर दिखाई नहीं देते. जो लोग सोचते हैं कि अपने बच्चों के आसपास धूम्रपान न करना काफी है, लेकिन ऐसा नहीं है. हवा में जो तंबाकू के कीटाणु मिले होते हैं, वे तैरते हुए दूर तक भी जा सकते हैं. धूम्रपान को छोड़ देना ही बच्चों को तंबाकू से होने वाले खतरे से बचा सकता है. धूम्रपान से आपके बच्चों को नुकसान पहुंचने का खतरा होता है जो कि उनके सेहत के लिए हानिकारक है.

खिलौनों पर भी चिपक जाता है निकोटिन:
डॉ. विनय कहते है तंबाकू के हानिकारण निकोटिन मिट्टी में, घर की सतहों से, धूम्रपान करने वालों के कपड़ों से और घर में मौजूद चीजों, यहां तक कि खिलौनों पर भी जाकर चिपक जाते हैं और हाथो-हाथ फैलते चले जाते हैं. इन चीजों के संपर्क में आने से शिशुओं और बच्चों में स्वास्थ संबंधी परेशानियां बढ़ जाती हैं. जैसे सांस की बीमारी, कानों में संक्रमण, खांसी, दमा होती है.

इन मानकों का पालन कर कोविड-19 से रहें दूर

-व्यक्तिगत स्वच्छता और 6 फीट की शारीरिक दूरी बनाए रखें।
-बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
-साबुन और पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल आधारित हैंड सेनेटाइजर का इस्तेमाल करें।
-छींकते और खांसते समय अपनी नाक और मुंह को रूमाल या टिशू से ढंके।
-उपयोग किए गए टिशू को उपयोग के तुरंत बाद बंद डिब्बे में फेंके।
-घर से निकलते समय मास्क का इस्तेमाल जरूर करें.
-बातचीत के दौरान फ्लू जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों से कम से कम 6 फीट की दूरी बनाए रखें।
-आंख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।
-मास्क को बार-बार छूने से बचें एवं मास्क को मुँह से हटाकर चेहरे के ऊपर-नीचे न करें।
-किसी बाहरी व्यक्ति से मिलने या बात-चीत करने के दौरान यह जरूर सुनिश्चित करें कि दोनों मास्क पहने हों।
-कहीं नयी जगह जाने पर सतहों या किसी चीज को छूने से परहेज करें।
-बाहर से घर लौटने पर हाथों के साथ शरीर के खुले अंगों को साबुन एवं पानी से अच्छी तरह साफ करें।

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