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देवी माँ – (माँ को प्रणाम)

मैं एक भाग्यवान व्यक्ति हूँ, मेरी अम्मा!
मैं अकेला नहीं हूँ, मेरी माँ
प्रारंभ से मैं कभी भी अकेला नही रहा
आप हमेशा रहीं मेरे साथ
मेरी पहली सांस से लेकर अब तक
मेरे पहले कदम से लेकर अब तक
मेरे पहले रोने से अबतक की मुस्कुराती हुई मुस्कान तक
जन्म से जन्म, पुनर्जन्म
जिंदगी जीने से जिंदादिली तक
क्षमता प्रदायनी है मेरी प्रिय अम्मा!!!
गर्भनाल से जुड़कर जीवन का एहसास करवाया
संगीतमय प्रकृति का एहसास
संतोष और गर्व का अनुभव
हमेशा के लिए आवश्यक आपके प्रेम का एहसास
मैं एक धन्य व्यक्ति हूँ, मेरी अम्मा
मैं अकेला नहीं हूँ, मेरी माँ!

माँ, आपने मेरे चरित्र को विकसित किया
प्रत्येक महिला अपने आप में देवी हैं
माँ, ईश्वर का स्वरूप हैं
माँ, पीड़ा सहने वाली, मनुष्य की पहचान हैं
हर स्त्री, एक देवी माँ हैं!
और इस तरह माँ के रूप में भगवान हर जगह उपस्थित है
हमेशा सहयोगिनी मेरी माँ
मैं प्रार्थना करता हूं आप सर्वज्ञ रहें
जिससे कोई मेरा बुरा न कर सके
ऐसा कोई मजबूत बंधन नहीं;
ऐसी कोई दिव्य भावना नही
ऐसी कोई प्राकृतिक बंधन नही
मुश्किलों में मेरा सबसे बड़ा सहारा
हर दर्द को झेल गया आपके प्यार में
मैं एक सौभाग्यशाली व्यक्ति हूँ, मेरी अम्मा!
मैं अकेला नहीं हूँ, मेरी माँ!

हमेशा से मेरी मूक रक्षक
मातृत्व की प्राकृतिक ढाल,
सभी प्रकार के कष्टों में आश्रय,
सारे गम सम्माहित कर लिए
धरती पर स्वर्ग की तरह आपका नेक दिल
ईश्वर का रूप हो आप अम्मा…!
आपकी परवाह ईश्वरीय कृत्य की तरह
ममत्व आपका धर्म
अकेले आपसे विकास की शुरुआत
मेरे सारे आँसुओं को पीनेवाली मेरी माँ
मातृत्व बड़प्पन का प्रतीक
सर्वशक्तिमान ईश्वर की आनंदमय रचना
माँ के आलौकिक प्यार में बंधा
मैं एक सौभाग्यशाली व्यक्ति हूँ, मेरी अम्मा!
मैं अकेला नहीं हूँ, मेरी माँ!

प्यारी माँ, प्यार की प्रकाश
सर्वश्रेष्ठ माँ, आशा की किरण
शक्तिशाली माँ, जीवन की शक्ति
सर्वमान सहनशील माँ, उदार्चित आत्मविश्वास का स्रोत
सर्वसक्षम माँ, निपुण भगवान की प्रतिरूप
प्रिय अम्मा, देवी माँ का अवतार
जो समर्पित, प्रतिबद्ध, उन्नत, अनुकरणीय – निरंतर एकमात्र प्यार है
माँ का प्यार अंतहीन
अल्फा से ओमेगा – असीम रूप से मनमोहक
क्या आप सभी पीढ़ियों में समान हैं?
क्या आप सम्पूर्ण मानवता में जागरूक नहीं?
हे पवित्र माँ, समस्त विश्व को आशीर्वाद दें
क्या सभी प्राणी समान रूप से भाग्यशाली नहीं?
हे परम माँ, सभी माताओं को आशीर्वाद दें
मैं एक भाग्यशाली व्यक्ति हूँ, मेरी अम्मा!
मैं अकेला नहीं हूँ, मेरी माँ!

‘चेसिंग अ शैडो’ से पामर्ती वेंकटरमणा द्वारा रचित, प्यारी आदरणीय माँ को समर्पित, स्वर्गीय श्रीमती पामर्ती सीताराम लक्ष्मी जी जिनका 11 दिसंबर,2021 को स्वर्गवास हुआ।
Credit – byline: पामर्ती वेंकटरमणा

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