“कारगिल विजय दिवस” पर विशेष : जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी

जब भी हम यह गीत सुनते है कि “ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लों पानी जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करों कुर्बानी….”, तो हमें देश के लिए अपने प्राण त्यागने वाले मां भारती के उन सपूतों की याद जरूर आती है जो युद्द् के मैदान से घर लोटकर नहीं आए. देश सलाम करता है उन वीर सपूतों को जिनकी वजह से आज हमारे देश की सीमाएं सुरक्षित है और जिनके कारण हम और आप चैन की नींद सोते हैं. आज का दिन काफी अहम है. आज कारगिल विजय के 20 साल पूरे हो गए हैं.

20 साल पहले इसी दिन भारत के वीर जवानों ने कारगिल से पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार भगाया था. इसके बाद हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है. 26 जुलाई 1999 को भारत ने कारगिल युद्ध में पाकिस्तान के दांत खट्टे किए थे. देश के वीर जवानों ने युद्ध के दौरान अपने अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया था, जिसे देश कभी भूला नहीं पाएगा. वह अपनी जाबांजी की कई ऐसी यादें छोड़ गए हैं जिन्हें याद करके आज भी हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है.

आज इस मौके पर देश भर में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है और पूरा देश कारगिल युद्द के दौरान शहीद हुए जवानों को याद कर रहा है. आज कारगिल विजय के 20 साल पुरे होने पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट कर कहा, ‘कारगिल विजय दिवस के मौके पर राष्ट्र 1999 में कारगिल की ऊंचाइयों पर हमारे देश की रक्षा करने वाले सशस्त्र बलों की वीरता को नमन करता है। हम उन लोगों के धैर्य और वीरता को सलाम करते हैं, जिन्होंने भारत की रक्षा की, जो कभी लौटकर नहीं आए, उनका भी कर्ज देश कभी नहीं चुका पाएगा.’

वहीं पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी ट्वीट कर कहा, ‘कारगिल विजय दिवस पर मां भारती के सभी वीर सपूतों को मैं ह्रदय से वंदन करता हूं। यह दिवस हमें अपने सैनिकों के साहस, शौर्य और समर्पण की याद दिलाता है। इस अवसर पर उन पराक्रमी योद्धाओं को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया.’ इस दौरान पीएम मोदी ने कुछ पुरानी तस्वीरे ट्वीट करते हुए बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान कारगिल जाने का मौका मिला था।

पीएम ने लिखा, ‘1999 में कारगिल युद्ध के दौरान मुझे कारगिल जाने का और वीर जवानों के साथ एकजुटता दिखाने का मौका मिला था। यह वह समय था, जब मैं जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में पार्टी के लिए काम कर रहा था। कारगिल का वह दौरा और उस दौरान जवानों से हुई मुलाकात कभी भुला नहीं सकूंगा.’

जानें कहां निकली है सरकारी वैकेंसी | 26th July 2019

26 जुलाई को कारगिल युद्ध के 20 साल पूरे होने पर देश अपने वीर जवानों को याद कर रहा है। टाइगर हिल पर कब्जे के लिए भारतीय सेना के 18 ग्रेनेडियर, 2 नागा और 8 सिख सैनिकों ने जंग छेड़ी. इसमें सबसे बड़ा योगदान ग्रेनेडियर योगेन्द्र यादव का रहा. दरअसल, कारगिल युद्ध का प्रारंभ उस समय हुआ था जब पाकिस्तान की सेना ने भारतीय सीमा में प्रवेश कर सामरिक रूप से महत्वपूर्ण चोटियों को अपने कब्जे में ले लिया.

24 जून 1999 को भारतीय सेना ने टाइगर हिल पर लेजर गाइडेड बमों से हमला किया था. कारगिल के युद्द में भारत की तीनों सेनाओं ने अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया, जिससे पाकिस्तान की सेना ने घुटने टेक दिए. 24 जून 1999 ही वो दिन था जब भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन “सफेद सागर” के तहत समुद्र तल से 5062 मीटर की ऊंचाई पर स्थित टाइगर हिल पर जोरदार हवाई हमला किया था.

वायुसेना का दिखा था शौर्य

भारतीय वायुसेना द्वारा किए गए इस हमले की निगरानी तत्कालीन वायुसेना प्रमुख अनिल यशवंत टिपनिस ने खुद एक विमान में बैठकर की थी. भारतीय वायुसेना ने इस हमले में मिराज 2000 विमानों का प्रयोग किया था और दुश्मनों के ठिकानों पर लेजर गाइडेड बम गिराकर दुश्मनों के ठिकानों को खाक कर दिया गया था. भारतीय सेना द्वारा किए गए इस हमलें में कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और आपको बता दें कि इसी हमले के कारण ही 4 जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर भारत का कब्जा हो सका.

भारतीय वायुसेना के इतिहास में 24 जून 1999 की तारीख एक अलग पहचान भी रखती है. इसका कारण यह है कि भारतीय वायुसेना के इतिहास में यह पहला मौका था जब भारतीय वायुसेना ने युद्द के दौरान लेजर गाइडेड बम का उपयोग किया और पाकिस्तान को धूल चटाई. वायुसेना द्वारा प्रयोग की गई लेजर गाइडेड बमों के भारत के विश्वसनीय मित्र देश इजरायल से खरीदा गया था. आपको बता दें कि लेजर गाइडे़ बमों को विमान में फिट करने के लिए इजरायल से इंजीनियरों की एक टीम भारत आई थी.

कागिल युद्द के दौरान दरअसल, टाइगर हिल पर विजय पाना आसान नहीं था. ऊंचाई पर बंकर बनाकर बैठे और लगातार गोलियों की बौछार कर रहे दुश्मनों तक पहुंचना भारतीय सैनिकों के लिए काफी मुशकिल था. भारतीय सेना को दरअसल, रस्सी के सहारे ऊंचाई पर बैठे दुश्मनों तक पहुंचना था. इसका जिम्मा उस समय 18 ग्रेनेडियर की घातक टीम को सौंपा गया. भारतीय सेना के जाबांज सिपाही योगेंद्र सिंह यादव ने स्वैच्छिक रूप से प्लाटून को चोटी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ली .

जाने खड़े होकर खाना खाने के नुकसान | Healthy life tips

वहीं चोटी पर अपनी टीम के साथ चढ़ाई कर योगेंद्र सिंह यादव और उनकी टीम पर दुश्मनों ने गोलियों की बैछार कर दी, जिससे तीन भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त कर गए. इस दौरान योगेंद्र सिंह यादव बुरी तरह घायल हो गए पर उन्होनें चढ़ाई जारी रखी. वहीं जब वें चढ़ाई जारी रखते हुए दुश्मनों के बंकर पर पहुंचे तो उन्होंने दुश्मनों के बंकर पर ग्रेनेड से हमला कर दिया जिसमें चार दुश्मन मारे गए.

इस दौरान घायल योगेंद्र को सुरक्षित निकालने को कहा गया लेकिन वे नहीं माने और दुश्मनों से लोहा लेते रहे. इस दौरान खून से लथपथ योगेंद्र सिंह यादव दुश्मनों के दूसरे बंकर पर हमला कर दूसरे बंकर को भी उड़ा दिया. दुश्मनों का दूसरा बंकर उड़ने के बाद दुश्मनों की ओर से हो रही फायरिंग शांत हो गई और घातक प्लाटून के असाधारण शौर्य प्रदर्शन से टाइगर हिल पर भारत का कब्जा हो गया. ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव के इस अदम्य साहस और शोर्य के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा परमवीर चक्र का सम्मान दिया गया.

ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव को देश आज भी नहीं भूला है. जब भी कारगिल युद्ध और टाइगर हिल पर फतह की बात होती है तो ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव का जिक्र जरूर होता है. वहीं जब भारतीय सैनिकों ने टाइगर हिल पर कब्जा कर तिरंगा लहराया तब पाकिस्तान की हिम्मत उस समय टूट गई. उस समय पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ ने मदद के लिए अमेरिका का रूख किया लेकिन अमेरिका ने मदद देने से इनकार कर दिया.

वहीं भारत के हाथों मिली हार से पाकिस्तान घबरा गया और 5 जुलाई को पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ ने पाकिस्तानी सेना के हटाए जाने का बयान दिया. वहीं पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ के इस बयान से पाकिस्तानी सेना का मनोबल पूरी तरह टूट गया.

आज जब कारगिल युद्ध के 20 साल पूरे हो गए है तो आज भी देश भारत मां के उन वीर सपूतों को नहीं भूला है जिन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान देश की रक्षा के लिए अपने प्राण त्याग दिए. देश नहीं भूला है उन माओं को जिन्होंने कारगिल युद्द के दौरान अपना बेटा खोया था. देश सलाम करता है भारत मां के उन वीर सपूतों को जो अपनी मातृभूमि के लिए शहीद हो गए. देश उन शहीदों को न कभी भूला है और न ही कभी भूलेगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *