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Shani Dev Ki Mahima: शनि देव से उलझना सम्राट विक्रमादित्य को पड़ा महंगा, इस तरह टूटा था अहंकार

Shani Dev Ki Mahima

धार्मिक मान्यता है कि शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करने से साधक के जीवन में व्याप्त सभी दुख और संकट दूर हो जाते हैं।

अतः साधक विधि विधान से कर्मफलदाता की पूजा-अर्चना करते हैं। ज्योतिषियों की मानें तो शनि देव की कुदृष्टि पड़ने पर जातक के जीवन में अस्थिरता आ जाती है। जातक को जीवन में ढेर सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।  शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव को समर्पित है। इस दिन श्रद्धा भाव से शनि देव की पूजा-उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करने से साधक के जीवन में व्याप्त सभी दुख और संकट दूर हो जाते हैं। अतः साधक विधि विधान से कर्मफलदाता की पूजा-अर्चना करते हैं। ज्योतिषियों की मानें तो शनि देव की कुदृष्टि पड़ने पर जातक के जीवन में अस्थिरता आ जाती है। जातक को जीवन में ढेर सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। प्राचीन समय में सम्राट विक्रमादित्य ने भी शनि देव की शक्तियों को हल्के में लेने की भूल की थी। इसके चलते उन्हें जीवन में अकल्पनीय मुश्किलों से गुजरना पड़ा था। आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं

कथा

सम्राट विक्रमादित्य तत्कालीन समय में एशिया नरेश थे। इतिहासकारों का कहना है कि उन्होंने रोमन राजा जूलियस सीजर को भी युद्ध में परास्त किया था। शकों को परास्त करने के चलते उन्हें सम्राट की उपाधि दी गई। उनका साम्राज्य पूरे एशिया में फैला हुआ था। अतः उन्हें एशिया नरेश भी कहा जाता था। एशिया नरेश, आदिशक्ति के परम भक्त थे। सम्राट विक्रमादित्य हर वर्ष धूमधाम से नवरात्रि मनाते थे। एक बार नवरात्रि के दौरान धर्म चर्चा हुई। इस चर्चा में शनि देव भी उपस्थित थे।

उसी समय ज्योतिषियों ने सम्राट विक्रमादित्य की कुंडली देख उन्हें शनि देव की पूजा करने की सलाह दी। सम्राट विक्रमादित्य ने शनिदेव को भगवान मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद शनिदेव के साथ उनकी बहस हो गई। तत्क्षण शनि देव ने कहा- भविष्य में आपको शनि देव की उपासना करने की आवश्यकता पड़ेगी। यह कहकर शनि देव चले गए। तब सम्राट अहंकार में आकर बोले- सही समय पर शनि महाराज चले गए। मैं उनकी चुनौती को स्वीकार्य करता हूं। धर्म पंडितों ने उन्हें ऐसा करने से मना किया। हालांकि, सम्राट नहीं माने।

 

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