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मन में भोलेनाथ को बसाकर देवघर आई भक्‍तों की टोली

आज है सावन का पहला सोमवार, सावन में देवघर में भक्‍तों की बरसात ;

आज श्रावणी मेला का पहला सोमवार है। एक लाख कांवरिया पहुंच चुके हैं। भोलेबाबा पर जल चढ़ाने के लिए हजारों की तादात में श्रद्धालु कतारों में खड़े हुए हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए पांच किलोमीटर तक लंबी लाइन लगी हुई है।

सावन में देवघर में भक्‍तों की बरसात

द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भक्ति की बयार बह रही है और उस बयार से मंदिर प्रांगण ही नहीं पूरा बाबाधाम सुगंधित हो रहा है। सावन में जब तक भक्तों की बरसात देवघर में नहीं होती है, तब तक आध्यात्मिक नगरी की रौनक नहीं बनती है।मेला के छह दिन बाद देवघर में कांवरिया पवन के झोंके की तरह झूम रहे हैं। रविवार रात 12 बजे से भोलेनाथ के भक्त सोमवार को पूजा करने की लालसा मन में रखकर कतार में लगने के लिए जाने लगे थे। प्रशासनिक व पुलिस पदाधिकारी पूरी रात ड्यूटी पर तैनात रहे।

सुबह तीन बजकर पांच मिनट पर खुला पट

आज बाबा बैद्यनाथ का पट सुबह तीन बजकर पांच मिनट पर खोला गया। परंपरा के मुताबिक सबसे पहले काचाजल अर्पित किया गया। इस समय केवल तीर्थपुरोहित व उनके परिवार के सदस्य थे। इसके बाद बाबा की प्रातःकालीन पूजा पुरोहित राकेश झा ने की। दुधिया रोशनी की छटा और भी भक्ति भाव बना रहा था। मन को पुष्प की तरह पुलकित कर रहा था। आसमान में बादलों से झांकता चांद यह बता रहा था कि ब्रह् बेला है।

हर हर महादेव के जयकारे से गूंजा पूरा शहर

वरीय अधिकारी नजरें घुमाकर व्यवस्थाओं को निहार रहे हैं। हर हर महादेव…। बाबा बैद्यनाथ की जय, मैया पार्वती की जय …। यह जयकारा सुनते ही मंदिर प्रांगण के संस्कार भवन में कतारबद्ध हजारों कांवरियों ने जयकारा लगाया। बोलो बाबा बैद्यनाथ की जय। बोल बम, बोल बम…। अब यह बोल प्रांगण में गूंजने लगा।

जलाभिषेक का सिलसिला शुरू

भक्तों में फुर्ती आ गयी क्योंकि अब उनके दर्शन की बारी आ गयी थी। प्रातःकालीन पूजा 3:55 में पूरा हो गया। वाॅकी टाॅकी पर आवाज सुनाई दी कि कांवरियों को धीरे-धीरे आगे बढ़ने दें और इसी के साथ कपाट खोल दिया गया। बोल बम के बीच जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो गया। प्रशासन की एक ही चिंता कि देवघर आए सभी भक्तों को सुरक्षित और सुगम दर्शन कराया जाए।

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