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UP Politics: एमएलसी चुनाव में सपा की हार पर मायावती ने कसा तंज

UP Politics यूपी एमएलसी चुनाव में सपा को म‍िली हार के बाद मायावती ने कहा क‍ि चुनाव में सपा द्वारा दलित व ओबीसी उम्मीदवार को खड़ा करना हरवाना तथा ज्यादा संख्या बल होने पर इनकी अनदेखी करना सपा की षडयंत्रकारी नीति बताता है। यूपी एमएलसी की दो सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा के दोनों प्रत्‍याश‍ियों के जीतने व सपा के दोनों प्रत्‍याश‍ियों के हारने पर मायावती ने तंज कसते हुए सपा को षडयंत्रकारी बताया है। मायावती ने कहा क‍ि सपा ने जानबूझकर दलित व ओबीसी उम्मीदवार को खड़ा क‍िया और फ‍िर उन्‍हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

मायावती ने ट्वीट कर कहा क‍ि यूपी विधान परिषद की दो सीटों के लिए कल हुए उपचुनाव में, हार निश्चित होने के बावजूद, चुनाव में सपा द्वारा दलित व ओबीसी उम्मीदवार को खड़ा करना, हरवाना तथा ज्यादा संख्या बल होने पर इनकी अनदेखी करना यह साबित करता है कि इन वर्गों के प्रति सपा की षडयंत्रकारी नीति थोड़ी भी नहीं बदली।

सपा व इनकी रही सरकारों के दौरान इनकी ऐसी ही संकीर्ण व घृणित राजनीति से दलितों, अन्य पिछड़ों एवं अक्लियत समाज के लोगों का काफी अहित होता रहा है। इसीलिए आगे ऐसे नुकसान से बचने के लिए इन वर्गों के लोगों को हमेशा बहुत ही सावधान रहने की सख्‍त जरूरत है, बीएसपी की यह अपील।

बता दें क‍ि विधान परिषद की दो सीटों के लिए हुए उपचुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की है। भाजपा के मानवेन्द्र सिंह व पदमसेन चौधरी विजयी हुए हैं। सपा को इस चुनाव में भी निराशा हाथ लगी है। मानवेन्द्र को 280 व सपा के रामजतन राजभर को 115 मत मिले हैं। एक मत अवैध हो गया। इसी प्रकार पदमसेन को 279 व सपा के रामकरन निर्मल को 116 मत मिले। इसमें भी एक मत अवैध हुआ। इस चुनाव में भाजपा के आगे विपक्ष बिखर गया। कांग्रेस व बसपा ने भी सपा का साथ नहीं दिया।

कांग्रेस के दो व बसपा के एक मात्र विधायक ने मतदान में हिस्सा ही नहीं लिया। ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा ने भी सत्ताधारी दल भाजपा का साथ दिया। रघुराज प्रताप सिंह की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक ने भी भाजपा प्रत्याशियों को वोट दिया। सिक्किम के राज्यपाल बनने के बाद भाजपा एमएलसी लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने इस साल 15 फरवरी को इस्तीफा दे दिया था। वहीं, बनवारी लाल दोहरे की 15 फरवरी को मृत्यु होने के बाद दोनों ही सीटें रिक्त हो गईं थीं। लक्ष्मण प्रसाद आचार्य का कार्यकाल 30 जनवरी 2027 तक था, जबकि बनवारी लाल दोहरे का कार्यकाल छह जुलाई 2028 तक था।

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