कोरोना काल में कमजोर नवजात की विशेष देखभाल की जरूरत: सीएस

  • कमजोर नवजात की पहचान सबसे अहम कड़ी
  • चिन्हित कमजोर नवजातों को मिल रही बेहतर देखभाल जमुई, 4 नवंबर

कमजोर नवजात की विशेष देखभाल की जरूरत होती है। इस लिहाज से कोरोना काल में मां की चुनौतियां और बढ़ गयी है. बेहतर साफ-सफाई एवं देखभाल के जरिए कोरोना संक्रमण काल में भी कमजोर नवजात को स्वस्थ बना सकते हैं. यह बातें जमुई के सिविल सर्जन डॉ. विजेंद्र सत्यार्थी ने बुधवार को सदर अस्पताल में सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च के सहयोग से जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा कोविड-19 के दौरान कमजोर नवजात देखभाल पर आयोजित मीडिया कार्यशाला में कही.

सिविल सर्जन डॉ. सत्यार्थी ने कहा कि कमजोर बच्चे की पहचान सबसे अहम है. अगर आप इस में सफल हो जाते हैं तो उसे स्वस्थ बनाना बड़ी बात नहीं है. ऐसा देखा गया है कि कमजोर नवजात में तापमान की कमी की समस्या रहती है. इससे निजात पाने में कंगारू मदर केयर रामबाण साबित हो रहा है. कंगारू मदर केयर के जरिए माँ या घर का कोई भी व्यक्ति नवजात को अपने सीने से चिपकाकर उन्हें गर्मी देते हैं। यह प्रक्रिया तब तक करने की सलाह दी जाती है जब तक बच्चे का वजन 2.5 किलोग्राम न हो जाए। इसके साथ-साथ सदर अस्पताल में रेडिएंट वार्मर की भी व्यवस्था है. बच्चा अत्यधिक कमजोर है तो उसे एसएनसीयू में भर्ती कराया जाता है, जहां पर उसका उचित इलाज किया जाता है.

मां संक्रमित भी हो जाए तो स्तनपान कराना नहीं भूलें:

डॉक्टर सत्यार्थी ने कहा कि अगर मां कोरोना संक्रमित भी हो जाए तो बच्चे को स्तनपान कराना नहीं छोड़ना चाहिए. हां, सावधानी जरूर बरतनी चाहिए. जैसे कि बच्चे को छूने से पहले हाथ को साफ कर लेना चाहिए. दिन में एक बार स्तन की भी सफाई जरूर कर लेनी चाहिए. इसके अलावा जब बच्चा पास में हो तो मास्क जरूर पहनना चाहिए. इन सावधानियों के साथ हम कोरोना काल में भी कमजोर नवजात को स्वस्थ बना सकते हैं.

कार्यशाला के दौरान सेंटर फ़ॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च के अपर राज्य प्रबंधक रंजीत कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल में स्वाथ्य कर्मियों की तरह मीडिया कर्मियों ने भी अपना पूरा योगदान दिया है। उन्होंने मीडिया की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों की सफ़लता में मीडिया की हमेशा से ही भूमिका रही है एवं समुदाय के आखिरी व्यक्ति को जागरूक करने में मीडिया की सक्रियता को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में किया जा रहा जागरूक: कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीपीएम सुधांशु नारायण लाल ने बताया कि कोरोना काल में कमजोर नवजात की देखभाल को लेकर स्वास्थ्य विभाग जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है. आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविका की मदद से गांव में जाकर लोगों को कमजोर नवजात की देखभाल से संबंधित उपाय बताए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि कमजोर नवजात पैदा नहीं हो इसे लेकर गर्भावस्था की शुरुआत से ही देखभाल की जरूरत है.

कमजोर नवजात की पहचान के लिए इक्विपमेंट होना जरूरी: केयर इंडिया के डीटीएल संजय कुमार सिंह ने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण बात कमजोर नवजात की पहचान है और इसके लिए जरूरी उपकरण होना जरूरी है. आमतौर पर सभी सदर अस्पताल में इसे लेकर डिजिटल मशीन उपलब्ध है. डिजिटल मशीन नहीं रहने से कमजोर बच्चे की पहचान में परेशानी होती है. अगर 50 ग्राम भी बच्चे का वजन कम है तो इसकी पहचान डिजिटल मशीन से ही की जा सकती है, जो मैन्युअल मशीन में छूट जाती है। उन्होंने कहा कि अगर एक बार बच्चे की पहचान हो गई तो फिर उसे स्वस्थ करना आसान हो जाता है.

कमजोर बच्चे की कैसे करें पहचान:

कमजोर नवजात की पहचान मुख्यतः 3 तरीके से होती है. इसमें पहला तरीका है उसका वजन 2000 ग्राम या इससे कम हो. दूसरा तरीका है कि बच्चा स्तनपान करने में सक्षम नहीं हो और तीसरा तरीका है कि बच्चे का जन्म गर्भावस्था के 37 सप्ताह के पहले हो गया हो. इन पैमानों पर नवजात को जन्म के बाद परखने की जरूरत है और अगर बच्चा कमजोर पाया जाता है तो उसकी देखभाल शुरू कर देने की जरूरत है.

जन्म से पहले जन्म लेने वाले नवजातों को मौत का अधिक ख़तरा:

कार्यशाला के दौरान बताया गया कि नवजात शिशुओं में होने वाली मौतों में 35% बच्चे की मौत समय से पहले जन्म के कारण होती है. वहीं 32% बच्चे की मौत निमोनिया,सेप्सिस एवं डायरिया जैसी बीमारी से होती है.जबकि 19% मौतें बर्थ एसफिक्सिया के कारण होती है।

कमजोर नवजात को 30 दिनों तक विशेष देखभाल की जाती है:

कमजोर नवजात की बेहतर देखभाल के लिए कमजोर नवजात देखभाल कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है, जिसमें कमजोर नवजातों को 30 दिनों तक फॉलो-अप किया जाता है। इसके लिए फैसिलिटी स्तर से एनएनएम या डॉक्टर आशा एवं परिवार का 9 बार फॉलो-अप करती हैं। कमजोर नवजात के पहले 7 दिन तक अल्टरनेट डे पर आशा एवं परिवार का फॉलोअप किया जाता है। आठवां कॉल 14 वें दिन एवं 9 वां कॉल 30 वें दिन कर परिवार से कमजोर नवजात का हाल पूछा जाता है।

काउंसलिंग के वक्त दिया जाता है एक पासपोर्ट: जब कमजोर नवजात को लेकर परिजन की काउंसलिंग की जाती है तो उस वक्त उन्हें एक पासपोर्ट दिया जाता है, जिसमें बच्चे के लिए जरूरी अतिरिक्त देखभाल एवं खतरे के संकेत लिखे होते हैं।

कार्यक्रम में मुंगेर प्रमंडल के कार्यक्रम समन्वयक श्याम त्रिपुरारी, शिव शंकर भी मौजूद थे

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