लखीसराय जिले के सभी ऑगनबाड़ी केंद्रों पर हुआ अन्नप्राशन का आयोजन

  • छः माह से उपर के बच्चों को खिलाया गया पौष्टिक आहार
  • डीपीओ ने जिले के दो केंद्रों पर अपने हाथों से बच्चे का कराया अन्नप्राशन
  • कार्यक्रम के दौरान पोषण के महत्व की दी गई विस्तार से जानकारी

लखीसराय, 19 दिसंबर।
लखीसराय जिले के सभी प्रखंडों में शनिवार को अन्नप्राशन कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दौरान जिले के सभी सेविका ने अपने-अपने पोषक क्षेत्र के छः माह की उम्र पार करने वाले बच्चों को गृह भेंट कार्यक्रम के तहत अन्नप्राशन कराया और बच्चे की माँ को बच्चे के स्वस्थ शरीर निर्माण को लेकर अन्नप्राशन के महत्व की विस्तार से जानकारी दी। इधर, आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा समेत विभाग के अन्य पदाधिकारी व संबंधित क्षेत्र की पर्यवेक्षिका (एलएस) ने क्षेत्र भ्रमण कर अन्नप्राशन कार्यक्रम की मॉनिटरिंग की।

  • ऑगनबाड़ी केंद्र संख्या 127 व 56 पर डीपीओ ने खुद कराया अन्नप्राशन :-
    जिले के ऑगनबाड़ी केंद्र संख्या 127 पोषक क्षेत्र की पूजा देवी के घर जाकर उनके 08 माह की पुत्री पायल कुमारी एवं केंद्र संख्या 56 पोषक क्षेत्र की ललिता देवी के घर जाकर उनके 07 माह के पुत्र अनुज कुमार को आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा ने गृह भेंट कार्यक्रम के तहत खुद अन्नप्राशन कराया और दोनों बच्चे को अपने हाथों से आहार खिलाया।
  • अन्नप्राशन के साथ दो वर्षों तक स्तनपान भी जरूरी : –
    जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कुमारी अनुपमा ने बताया कि इस दौरान मौजूद बच्चों की माँ को बच्चे के स्वस्थ शरीर निर्माण को लेकर आवश्यक जानकारियाँ दी गई। जिसमें बताया कि बच्चों को अन्नप्राशन के साथ कम से कम दो वर्षों तक स्तनपान भी कराएं और छः माह तक सिर्फ स्तनपान ही कराएं । तभी बच्चे का स्वस्थ शरीर निर्माण हो पाएगा। इसके अलावे 6 माह से ऊपर के बच्चों के अभिभावकों को बच्चों के लिए पूरक आहार की जरूरत के विषय में जानकारी दी गयी। 6 माह से 9 माह के शिशु को दिन भर में 200 ग्राम सुपाच्य मसला हुआ खाना, 9 से 12 माह में 300 ग्राम मसला हुआ ठोस खाना, 12 से 24 माह में 500 ग्राम तक खाना खिलाने की सलाह दी गयी। इसके अलावा अभिभावकों को बच्चों के दैनिक आहार में हरी पत्तीदार सब्जी और पीले नारंगी फल को शामिल करने की बात बताई गयी। चावल, रोटी, दाल, हरी सब्जी, अंडा एवं अन्य खाद्य पदार्थों के पोषक तत्वों के विषय में चर्चा कर अभिभावकों को इसके विषय में जागरूक किया गया।
  • पौष्टिक आहार की महत्ता की दी गई जानकारी :-
    शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा-पीला दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अगले छह माह तक केवल मां का दूध बच्चे को कई गंभीर रोगों से सुरक्षित रखता है। 6 माह के बाद बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास काफी तेजी से होता है। इस दौरान स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की काफी जरूरत होती है। घर का बना मसला व गाढ़ा भोजन ऊपरी आहार की शुरुआत के लिए जरूरी होता है। वहीं, कहा कि सामान्य प्रसव के लिए गर्भधारण होने के साथ ही महिलाओं को चिकित्सकों से जाँच करानी चाहिए और चिकित्सा परामर्श का पालन करना चाहिए।
  • स्वच्छता एवं साफ-सफाई पर दिया गया बल:-
    साफ पानी एवं ताजा भोजन संक्रामक रोगों से बचाव करता है। शौच जाने से पहले एवं बाद में तथा खाना खाने से पूर्व एवं बाद में साबुन से हाथ धोना चाहिए। घर में तथा घर के आस-पास सफाई रखनी चाहिए। इससे कई रोगों से बचा जा सकता है।
  • कोविड-19 से बचाव की भी दी गई जानकारी :-
    कार्यक्रम दौरान लोगों को कोविड-19 से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी दी गई। जैसे कि, मास्क, दो गज की शारीरिक- दूरी, हैंड सैनिटाइजर का अनिवार्य रूप से उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही भीड़ से बचने की अपील की गयी।
  • इन बातों का रखें ख्याल : –
  • 6 माह बाद स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार शिशु को दें।
  • स्तनपान के अतिरिक्त दिन में 5 से 6 बार शिशु को सुपाच्य खाना दें।
  • शिशु को मल्टिंग आहार (अंकुरित साबुत आनाज या दाल को सुखाने के बाद पीसकर) दें।
  • माल्टिंग से तैयार आहार से शिशुओं को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
  • शिशु यदि अनुपूरक आहार नहीं खाए तब भी थोड़ा-थोड़ा करके कई बार खिलाएं।
  • इन मानकों का रखें ख्याल, कोविड-19 संक्रमण से रहें दूर :-
  • व्यक्तिगत स्वच्छता और दो गज की शारीरिक-दूरी का रखें ख्याल।
  • बार-बार हाथ धोने की आदत डालें।
  • साबुन या अन्य अल्कोहल युक्त पदार्थों से हाथ धोएँ।
  • मास्क और सैनिटाइजर का नियमित रूप से उपयोग करें।
  • भीड़-भाड़ वाले जगहों से परहेज करें।
  • ऑख, नाक, मुँह को अनावश्यक छूने से बचें।

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